सिटी पोस्ट लाइव : प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (जसुपा) तेजस्वी यादव के गढ़ राघोपुर में उन्हें चुनौती देने की तैयारी में है. जन सुराज पार्टी (जसुपा) के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) को आगे कर तेजस्वी यादव को उस राघोपुर में ही घेरे रखने की रणनीति बनाई जा रही है.गौरतलब है कि राघोपुर से तेजस्वी यादव विधानसभा के पिछले दो चुनाव वे जीत चुके हैं.आरजेडी का बेहद मजबूत गढ़ है.फिर भी सामने जब प्रशांत किशोर हों तो चुनौती तो बढ़ ही सकती है.
अब पार्टी के नाम-निशान पर भी तेजस्वी यादव का अधिकार सुप्रीमो लालू प्रसाद के बराबर हो गया है. मुख्यमंत्री पद के लिए वे राजद से एकमात्र चेहरा हैं.पिछले चुनावों में पार्टी का प्रचार अभियान भी उन्हीं के बूते रहा है. ऐसे में तेजस्वी अगर अपने ही विधानसभा क्षेत्र में घिर जाते हैं तो विरोधी दलों के लिए शेष बिहार में राजद से लड़ाई और सहज हो जाएगी. इसी रणनीति के तहत प्रशांत किशोर राघोपुर से मैदान में उतरने की कोशिश कर रहे हैं.विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक अभ्यर्थियों से जसुपा अभी आवेदन ले रही. पीके स्वयं बता चुके हैं कि किसी कार्यकर्ता ने राघोपुर से उनके नाम का प्रस्ताव किया है.
जनसुराज के नेता पूर्व IPS अधिकारी अरविंद ठाकुर का कहना है कि बिहार की राजनीति में पीके एक स्वच्छ विकल्प हैं.उनकी उपस्थिति मात्र से ही पार्टियां बेकल हैं. वे जिस मैदान में होंगे, वहां से बाजी मारेंगे. हालांकि, अभी यह तय नहीं कि पीके चुनाव लड़ेंगे या नहीं और लड़ेंगे भी तो राघोपुर या किसी दूसरे क्षेत्र से.राघोपुर का सामाजिक समीकरण इस दियारे में राजद को अपनी संभावना के लिए आश्वस्त करता है. हालांकि, 2010 में जदयू के सतीश कुमार यहां पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को मात दे चुके हैं.उस चुनाव परिणाम से जसुपा व राजग का आकलन है कि राजद का यह यदुवंशी किला भी अभेद्य नहीं. लगभग 30 प्रतिशत यादव और 21 प्रतिशत राजपूत के साथ यहां अनुसूचित जाति में 12 प्रतिशत पासवान और आठ प्रतिशत रविदास मतदाता हैं.
तेजस्वी यादव के लिए ये सबसे सुरक्षित सीट है. हालांकि, विरोधी खेमे का आकलन है कि राजपूत और अनुसूचित जाति के मतों में विभाजन होगा.अति-पिछड़ा वर्ग का साथ तेजस्वी यादव के विरोध में खड़े प्रत्याशी को मिल सकता है.विधानसभा के पिछले चुनाव में लोजपा को मिले 24947 वोट इस उत्साह को कुछ और बढ़ा देते हैं.लेकिन आरजेडी के नेता भाई बिरेन्द्र कहते हैं- पीके भी जानते हैं कि राघोपुर में क्या हश्र होना है. वहां से चुनाव लड़ने की चर्चा सुर्खियों में बने रहने का उनका एक इवेंट है.
राघोपुर में तेजस्वी के वोटों में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी के वोट घटे हैं. रही बात लोजपा की, तो उसे जितने वोट मिले, उससे अधिक मतों (38174) के अंतर से तेजस्वी पिछली बार विजयी रहे हैं.30 प्रतिशत यादव, 21 प्रतिशत राजपूत और 20 प्रतिशत अनुसूचित जाति के मतदाता हैं.06 दशक से यादव समाज से विधायक, इनमें दो बार लालू और एक बार राबड़ी भी विधायक रह चुकी है.ऐसे में यहाँ से तेजस्वी यादव को हराना लोहे के चने चबाने जैसा है.