सिटी पोस्ट लाइव :बिहार में शिक्षकों को समय से वेतन मिल जाए तो बड़ी खबर बन जाती है.चुनावी साल में शिक्षकों की नाराजगी की चिंता सरकार को सताने लगी है. शिक्षा विभाग ने पूरे राज्य में शिक्षकों को वेतन देने के लिए एक नया नियम बना दिया है.महीनों वेतन के लिए इंतज़ार करनेवाले शिक्षकों को अब सबसे पहले वेतन मिलेगा. दफ्तर के कर्मचारियों को बाद में वेतन मिलेगा. सरकार ने शिक्षकों को समय पर वेतन देने के लिए ये बड़ा फैसला लिया है.
शिक्षा विभाग के आदेश में कहा गया है कि शिक्षकों को वेतन देने में सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा. विभाग के विशेष सचिव सुबोध कुमार चौधरी ने एक पत्र जारी किया है. इस पत्र में उन्होंने कहा है कि शिक्षकों का समय पर वेतन भुगतान विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है. शिक्षकों को समय पर वेतन देना विभाग का सबसे महत्वपूर्ण काम है.शिक्षा विभाग ने जिलों के शिक्षा अधिकारियों (DEO) को भी जिम्मेदार बनाया है. अगर किसी शिक्षक के वेतन में कोई समस्या आती है, तो DEO को खुद उस समस्या को हल करना होगा. चाहे PRAN नंबर में गड़बड़ी हो, HRMS में जानकारी अपडेट न हो, या आधार कार्ड में कोई गलती हो, DEO को तुरंत कार्रवाई करनी होगी. शिक्षकों को अब पटना या दूसरे दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.
अगर किसी जिले में शिक्षकों के वेतन के लिए बजट कम है, तो DEO को तुरंत मुख्यालय को फोन करके बताना होगा. बजट मांगना होगा. किसी भी हालत में शिक्षकों का वेतन नहीं रोका जाएगा. ‘शिक्षा की बात हर शनिवार’ कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने कहा था कि जब तक शिक्षक वेतन नहीं पाएंगे, तब तक अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलेगा. उन्होंने ये भी कहा था कि अगर किसी शिक्षक को जानबूझकर परेशान किया गया या उसका वेतन रोका गया, तो उस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
सरकार का ये फैसला शिक्षकों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है. सरकार ने ये भी साफ कर दिया है कि शिक्षक सिर्फ क्लासरूम में ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक कामों में भी सबसे ऊपर रहेंगे. इसका मतलब है कि शिक्षकों को हर तरह से प्राथमिकता दी जाएगी.जाहिर है चुनाव से पहले सरकार शिक्षकों को हर संभव मदद करने के लिए तैयार है. बिहार सरकार में हाल ही शिक्षकों और लाइब्रेरियन की सैलरी के लिए करीब 28 अरब रुपए जारी की है.