Bihar Election 2025:
सिटी पोस्ट लाइव : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर गठबंधन के दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मंथन शुरू हो गया है. एनडीए और महागठबंधन दोनों सहयोगी दलों के लिए सीटें छोड़ने की रणनीति पर चल रहे हैं. नए दलों के आने से गठबंधनों की टेंशन बढ़ गई है. अगर चुनाव निर्धारित समय पर हुआ तो अक्टूबर से शुरू होकर नवंबर में समाप्त होगा. लेकिन दलों की तैयारी से ऐसा लग रहा है कि ये किसी भी समय चुनाव के लिए तैयार हैं दोनों बड़े गठबंधन के दलों के बीच लड़ने वाली सीटों को लेकर मंथन शुरू हो गया है.
आम तौर पर पिछले चुनाव की हार-जीत और घटक दलों की संख्या में कमी-वृद्धि के आधार पर अगले चुनाव में सीटों का बंटवारा होता है. दोनों गठबंधन में इस आधार पर सहमति बनाने की कोशिश हो रही है कि जिस दल की पिछले चुनाव में जितनी सीटें थीं, वह उनके पास रह जाएं.बची हुई सीटों का बंटवारा जीत की संभावना के अनुमान से किया जाए. जीती हुई सीटों पर किसी गठबंधन में विवाद नहीं है, लेकिन बाकी सीटों का वितरण किस तरह किया जाए, इस पर मंथन चल रहा है.
एनडीए में लोजपा (रामविलास) के अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा इस विधानसभा चुनाव के नए फरीक हैं. महागठबंधन में वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) का आगमन हुआ है. दोनों गठबंधनों के लिए ये सहयोगी बड़ी समस्या पैदा कर रहे हैं.पिछले चुनाव में लोजपा स्वतंत्र रूप से 134 सीटों पर लड़ी थी. एक पर जीत हुई और उसके इकलौते विधायक जेडीयू में शामिल हो गये. वीआईपी को एनडीए ने 10 सीटें दी थीं. अब वह महागठबंधन से 40 से ज्यादा सीटों की मांग कर रही है. वह 20 से कम पर मान जाएगी, ऐसा नहीं लग रहा है.
2020 में महागठबंधन में आरजेडी 144, कांग्रेस-70, भाकपा माले-19, भाकपा-06, माकपा-04 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. महागठबंधन में मंथन का विषय यह है कि वीआईपी की मांग किस दल के हिस्से में कटौती करके पूरी की जाए.अगर कांग्रेस 30 और आरजेडी द 10 सीट छोड़ दे तो वीआईपी की मांग पूरी हो जायेगी. दूसरी तरफ वाम दलों की ओर से भी कुछ अधिक सीटों की मांग हो रही है.
2020 में एनडीए में सीटों का बंटवारा आसानी से हो गया था.जेडीयू 115,बीजेपी 110, वीआइपी के 10 और हम (हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा) के 7 उम्मीदवार मैदान में थे. इस बार लोजपा रामविलास ,उपेन्द्र कुशवाहा की लोक मोर्चा पार्टी भी एनडीए में शामिल है.एलजेपी 35 सीटों की मांग कर रही है .जीतन राम मांझी 40 सीटों की मांग कर रहे हैं.उपेन्द्र कुशवाहा भी 10 सीटों की उम्मीद कर रहे हैं.लेकिन एनडीए के पास तीनों दलों को देने के लिए 43 से ज्यादा सीटें नहीं हैं. मंथन हो रहा है कि बीजेपी और जेडीयू में पूर्व की कितनी सीटों को छोड़ने पर सहमति बनती है. अगर दोनों दल सौ-सौ सीटों पर लड़ने को तैयार हो जाएँ तो भी सहयोगी दलों को देने के लिए 43 से ज्यादा सीटें नहीं हैं.चिराग पासवान 30 से कम सीटों पर लड़ने को तैयार नहीं हैं.ऐसे में बाकी बची 13 सीटों में से ही हम और लोक मोर्चा के बीच बटवारा होना है