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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले, मोकामा के बाहुबली नेता और पूर्व विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत मिली है। उन्हें एक धमकी मामले में अदालत से जमानत मिल गई है, जिससे उनके चुनावी मैदान में उतरने की राह आसान हो गई है। बिहार में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होना है और आज से ही पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
नामांकन से पहले मिली कानूनी राहत
जानकारी के अनुसार, पूर्व विधायक अनंत सिंह ने गुरुवार को सांसद-विधायक से जुड़े आपराधिक मामलों की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया। यह मामला पटना हाईकोर्ट के एक वकील को मोबाइल फोन पर गाली-गलौज करने से जुड़ा था। अदालत ने एमपी-एमएलए की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई के बाद अनंत सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
अनंत सिंह के वकील सुनील कुमार सिंह ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत प्रदान की है। सूत्रों के अनुसार, आरोप लगाने वाले व्यक्ति ने दावा किया था कि इस कृत्य में जेल में बंद अनंत सिंह की संलिप्तता थी, लेकिन जमानत मिलने से बाहुबली नेता को बड़ी राहत मिली है।
14 अक्टूबर से नामांकन की योजना
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि अनंत सिंह जल्द ही मोकामा विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल करने की योजना बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह 14 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पहले चरण में राज्य की कुल 121 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है, जिसमें पटना की मोकामा, बाढ़ समेत कई प्रमुख सीटें शामिल हैं।
अन्य मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी
हालांकि, एक मामले में जमानत मिलने से अनंत सिंह की चुनावी राह आसान हुई है, लेकिन उनके सामने अभी भी कानूनी चुनौतियाँ बाकी हैं। राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा है कि रंगदारी मांगने के एक अन्य मामले में भी पूर्व विधायक अनंत सिंह और राजद प्रवक्ता श्रवण कुमार उर्फ बंटू सिंह के बयान आरोपी के रूप में दर्ज किए गए हैं। दोनों नेताओं ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इंकार किया है और उन्हें सिरे से खारिज किया है। इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है।
मोकामा की राजनीति पर पड़ेगा सीधा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोकामा क्षेत्र में अनंत सिंह की छवि और पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है। उनके खिलाफ आपराधिक मामलों और आरोपों के बावजूद, उनकी राजनीतिक संभावनाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। ऐसे में, पहले चरण के मतदान से ठीक पहले उनकी जमानत और संभावित नामांकन उन्हें एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करती है।
अनंत सिंह के समर्थकों में उनकी जमानत से उत्साह का माहौल है, और माना जा रहा है कि इससे क्षेत्र में चुनावी रणनीति और सक्रियता तेज हो जाएगी। वहीं, विपक्षी दलों ने आपराधिक मामलों में घिरे नेताओं के चुनावी मैदान में आने पर चिंता व्यक्त की है। आगामी 6 नवंबर के मतदान से पहले, यह देखना दिलचस्प होगा कि अनंत सिंह का नामांकन और उनकी सक्रियता चुनाव परिणामों पर किस तरह का निर्णायक असर डालती है।