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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के प्रचार के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मिथिलांचल की धरती दरभंगा से एक बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश दिया है। बुधवार को दरभंगा के अलीनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने न केवल क्षेत्र के लिए विकास की घोषणाएं कीं, बल्कि सीतामढ़ी में बन रहे मां जानकी मंदिर को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट भी साझा किया।
अयोध्या के बाद अब सीतामढ़ी: पीएम मोदी करेंगे प्राण प्रतिष्ठा
भाजपा प्रत्याशी मैथिली ठाकुर के समर्थन में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की सफलता का उल्लेख किया। इसी क्रम में उन्होंने सीतामढ़ी में 850 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे मां जानकी मंदिर की विस्तार से चर्चा की। गृहमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा, “अयोध्या के राम मंदिर की तरह ही माता जानकी के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही करेंगे।” हालांकि, उन्होंने इस भव्य आयोजन की तारीख की घोषणा नहीं की, लेकिन यह बयान मिथिलांचल की धार्मिक भावनाओं को साधने और प्रधानमंत्री के प्रति आस्था व्यक्त करने का एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
सीतामढ़ी से अयोध्या के लिए सीधी ‘अमृत भारत ट्रेन’
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अमित शाह ने एक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार सीतामढ़ी (माता जानकी का जन्मस्थान) और अयोध्या (भगवान राम की जन्मभूमि) को जोड़ने वाली एक ‘अमृत भारत ट्रेन’ चलाएगी। यह सीधी ट्रेन सेवा दोनों पवित्र स्थानों के बीच कनेक्टिविटी को सुगम बनाएगी।
मिथिला संस्कृति के लिए 500 करोड़ का सांस्कृतिक म्यूजियम
अमित शाह ने मिथिला और मैथिली संस्कृति के उत्थान के लिए कई विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने 500 करोड़ रुपये की लागत से एक सांस्कृतिक म्यूजियम स्थापित करने का ऐलान किया। इस म्यूजियम का लक्ष्य मिथिला की ज्ञान संपदा को संचित करना और नई पीढ़ी को इससे परिचित कराना होगा। गृहमंत्री ने कहा कि इस संग्रहालय में मिथिला के साथ-साथ पूरे बिहार के विद्वानों की पांडुलिपियों को संरक्षित किया जाएगा, जिससे ज्ञान की धारा और समृद्ध हो सके।
बाढ़ से मुक्ति और विकास पर जोर
अमित शाह ने केंद्र सरकार द्वारा मिथिला क्षेत्र में किए जा रहे अन्य कार्यों को भी गिनाया। उन्होंने दरभंगा और पूर्णिया में स्थापित एयरपोर्ट, मखाना बोर्ड और एम्स का उल्लेख किया। इसके अलावा, उन्होंने मिथिला की संस्कृति के अनुरूप रेलवे स्टेशनों के विकास और सबसे महत्वपूर्ण, इस क्षेत्र को बाढ़ के प्रभाव से मुक्त करने के लिए किए जा रहे कार्यों की भी चर्चा की।