2019 से सबक नहीं ले पाया नगर निगम, पटना में बाढ़ जैसे हालात, सड़कों से लेकर मोहल्ले डूबे.

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सिटी पोस्ट लाइव : 2019 में लगातार तीन दिन तक हुई बारिश ने पटना को डुबो दिया था.15 दिन पटना डूबा रहा.लेकिन उस तबाही से पटना नगर निगम ने सबक नहीं लिया. उसके बाद निगम में कई मशीन खरीदी गई, कैमरे लगाने के दावे किए गए. मगर जब बारिश हुई तो यह सभी दावे फेल होते नजर आएं.तैयारी हुई लेकिन वह नाकाफी साबित हुई. संप हाउस बढ़ाया लेकिन व्यवस्था नाकाफी- 2019 की अपेक्षा 2025 में संप हाउस की संख्या बढ़ाई गई है, लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी दिखी. मोहल्लों में सड़कों की खुदाई से ही यह व्यवस्था पर भारी हो गई है.पटना में 14 घंटे तक लगातार हुई भारी बारिश ने शहर की सूरत बदल दी. शहर का कोई ऐसा इलाका नहीं बचा था, जहां जल जमाव न हुआ हो. क्या रेलवे स्टेशन, क्या सड़क, क्या गली-मोहल्ले, पार्क, हर जगह सिर्फ पानी ही पानी.2019 से सबक नहीं लिया सिर्फ दावे किए गए- 2019 में लगातार तीन दिन तक हुई बारिश ने पटना को डुबो दिया था. इसके बाद निगम में कई मशीन खरीदी गई, कैमरे लगाने के दावे किए गए. मगर जब बारिश हुई तो यह सभी दावे फेल होते नजर आएं.

पटना में मेट्रो दौड़ाने को लेकर काम काफी तेजी से चल रहा है। मगर इसके निर्माण के कारण शहर में कई जगह गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं. निर्माण सामग्री भी जगह-जगह रखे हुए हैं, जो आस पास के नालों को चोक कर रहा है, और जल निकासी को रोक रहा है.शहर में कई जगह लोग नालियों के ऊपर अतिक्रमण करके रखते हैं. कुछ दुकानदार भी अपने ठेले नाली के ऊपर लगाते हैं, जिसके कारण कचरा डायरेक्ट नाली में जाते हैं और उसे चोक कर देते हैं. इससे जलनिकासी नहीं हो पाती है. इन नालियों के ऊपर से अतिक्रमण नहीं हटाना, जलनिकासी में एक बहुत बड़ी लापरवाही है.इसका मकसद था कैमरों के जरिए शहर में जलजमाव वाले इलाके की निगरानी करना. इसके लिए कई छोटे-बड़े नालों में 16 कैमरे लगाए गए थे, लेकिन ये कैमरे भी फेल हो गए और शहर पानी-पानी हो गया.बिहार विधानसभा कैंपस में पानी भर गया .बिहार विधानसभा कैंपस में पानी भर गया.गांधी मैदान में पानी भर गया.बांकीपुर अंचल में पटना नगर निगम का ऑफिस डूब गया.

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पटना में जलनिकासी के लिए 364 पंपों को तैयार किया गया था. इनमें इलेक्ट्रिक से चलने वाले 265 पंप, जबकि 99 डीजल पंप थे. इनमें से 256 पंप स्थायी DPS और 83 पंप अस्थायी DPS पर लगाए गए हैं.पटना नगर निगम के नगर आयुक्त अनिमेष कुमार पाराशर ने कहा, ‘रात से ही निगम की टीम अपने-अपने इलाकों में ड्यूटी पर तैनात हो गए थे. ‘सभी टीम ने मिलकर सुबह पानी को निकाला था, लेकिन फिर से भारी बारिश होने के कारण शहर जलमग्न हो गया.’यह बहुत कम समय में भारी बारिश हुई है. पूरी टीम काफी एक्टिव थी. अगर रात में ही टीम नहीं उतरती तो दिन में नजारा कुछ और ही रहता और इस पानी को निकालने में 2-3 दिन का समय लग सकता था.’
जल जमाव से निबटने के लिए नगर निगम की क्या तैयारी थी ?


पटना में बारिश के कारण जलजमाव न हो इसके लिए नालों में लगे CCTV और सेंसर को सीधे इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से जोड़ा गया था.पटना में बारिश के कारण जलजमाव न हो इसके लिए नालों में लगे CCTV और सेंसर को सीधे इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से जोड़ा गया था.जलनिकासी के लिए 19 जोन के लिए 19 टीम बनाई गई थी.मानसून के दौरान शहर में जलजमाव की स्थिति न हो इसके लिए QRT (क्विक रिस्पांस टीम) का गठन किया गया था. 19 जोन के लिए 19 टीम गठित हुई थी. पूरे 75 वार्ड को मिलाकर 1150 से ज्यादा कर्मियों को जलनिकासी के लिए लगाया गया था.


शहर में जगह-जगह नाला निर्माण- बारिश के मौसम में जगह-जगह नालों का निर्माण लोगों के लिए काल बन गया. आधी अधूरी बनी नालियों के कारण बरसात के मौसम में पानी की निकासी नहीं हो पाती है. नल एक दूसरे से कनेक्ट नहीं रहते हैं जिस कारण पानी आगे की ओर नहीं बह पाती है.नालों में कचरों का होना- निगम की ओर से नाला उड़ाही मानसून से पहले की गई थी. मगर लोगों की लापरवाही भी कई हद तक जलजमाव का कारण बनती है. कांच और प्लास्टिक की बोतल पेपर सहित अन्य कई सामानों को पालिका के डस्टबिन कंटेनर में न फेंककर लोग सीधे नालियों में ही फेंक देते हैं, जिससे नालियां चोक हो जाती है. इस कारण बरसाती पानी नालों से सड़कों पर ओवरफ्लो करने लगते हैं.
सवाल- ऐसी खबर सामने आ रही है कि शहर में अधिकतर इलाकों में मैनहोल बंद थे, इस कारण पानी ऊपर से बहते रहे. निगम के कर्मी भी बारिश रुकने का इंतजार कर रहे थे जिसके बाद उन्होंने जाकर मैनहोल के ढक्कन को हटाया और फिर पानी चेंबर में गया.शहर के कई मोहल्लों में जल निकासी के लिए अस्थाई पम्प नहीं थे. इस कारण गलियों में घुटनों भर पानी भर आया था और घरों में भी पानी घुस गए. निगम द्वारा हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया था, जिसमें कॉल करके लोग मदद के लिए टीम को बुलाए थे. कल 200 से ज्यादा कॉल जल निकासी समस्या के लिए आए थे.

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