सिटी पोस्ट लाइव : कांग्रेस 70 सीटों से कम पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है.इतना ही नहीं सीट शेयरिंग से पहले कांग्रेस ने अपने लिए 70 सीटें चुन ली हैं. पार्टी के इंटरनल सर्वे की रिपोर्ट में एक-एक सीट पर टिकट के दावेदारों के नाम लगभग तय हो चुके हैं.खास बात ये है कि इनमें RJD के अलावा JDU और BJP नेता का नाम भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस इस बार 15 पुरानी सीटें छोड़कर 15 नई सीटों की डिमांड कर रही है. इनमें 5 सीमांचल की हैं.
इन सीटों में 12 ऐसी हैं जिन पर RJD चुनाव लड़ती रही हैं. इनमें भी 11 सीटें ऐसी हैं, जहां से यादव कैंडिडेट चुनाव लड़े थे. इनके अलावा 2 सीटें CPI और एक सीट CPI(M) के हिस्से की है. मोहनिया सीट छोड़ दें, तो 2020 में बाकी 14 सीटों पर महागठबंधन को हार मिली थी.सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस 2020 में जीती 19 सीटें भी अपने पास रखना चाह रही है. दावेदारों की लिस्ट में परबत्ता सीट से JDU विधायक डॉ. संजीव कुमार और BJP के निरंजन राम भी हैं, जिनके लिए कांग्रेस फील्डिंग कर रही है.सूत्र बताते हैं कि पार्टी अब तक तीन सर्वे करा चुकी है. कांग्रेस अपने हिस्से की जिन 15 सीटों को छोड़ रही है, वहां 2000 या 2010 के बाद से महागठबंधन की कोई पार्टी नहीं जीती है.
कांग्रेस की लिस्ट के मुताबिक, पार्टी सीमांचल के 4 जिलों कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया में 5 नई सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. 2020 में पार्टी ने यहां की 9 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इन्हें भी पार्टी अपने पास रखना चाहती है. यानी सीमांचल में कांग्रेस इस बार 14 सीटें मांग रही है.2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अररिया, कदवा, कसबा, किशनगंज, कोढ़ा, पूर्णिया, प्राणपुर, अमौर, बहादुरगंज से चुनाव लड़ी थी. इनमें अररिया, कदवा, किशनगंज और कसबा में जीत मिली थी. बाकी 5 सीटें पार्टी हार गई थी. अब कांग्रेस रानीगंज, नरपतगंज, कोचाधामन, बायसी और बनमनखी सीट पर दावा कर रही है.9 सितंबर को दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ कांग्रेस नेताओं की मीटिंग में पार्टी के सांसदों ने कहा कि हमारे दो सांसद सीमांचल से हैं. हम वहां मजबूत हैं. इसलिए सीमांचल में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए. कांग्रेस के तारिक अनवर कटिहार और डॉ. मोहम्मद जावेद किशनगंज से सांसद हैं. इनके अलावा पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव भी कांग्रेस को सपोर्ट कर रहे हैं.
कांग्रेस 2020 में 70 सीटों पर लड़ी और 51 पर हार गई. कहा गया कि कांग्रेस को इतनी सीटें नहीं दी गई होतीं, तो महागठबंधन की सरकार बन सकती थी. कांग्रेस का तर्क है कि हमें लड़ने के लिए ज्यादातर वे सीटें दी गईं, जहां महागठबंधन कमजोर था. कांग्रेस को मिली 70 सीटों में से 50 सीटों पर महागठबंधन की कोई पार्टी पिछले 15 साल से नहीं जीती थी. अब कांग्रेस के लिस्ट से भी समझ आ रहा है कि पार्टी इस बार मजबूत और कमजोर सीटों का कॉम्बिनेशन बनाकर चुनाव लड़ेगी तभी strike रेट ठीक होगा.कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू कह चुके हैं कि महागठबंधन की सीट शेयरिंग में अच्छी और खराब सीटों का संतुलन होना चाहिए. ये न हो कि एक पार्टी अच्छी सीटों पर चुनाव लड़े और दूसरी खराब सीटों पर. कांग्रेस जिन 15 सीटों को ड्रॉप कर रही है, यहां 2000 या 2010 के बाद से कभी महागठबंधन चुनाव नहीं जीता है.
कांग्रेस बिहार में 1985 के बाद से सरकार नहीं बना पाई है. इस बार पार्टी अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए ताकत लगा रही है. राहुल गांधी वोटर अधिकार यात्रा निकाल चुके हैं. पार्टी वोट चोरी को मुद्दा बना रही है.कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की रणनीति है कि कम से कम हर जिले में एक सीट पर चुना लड़ा जाए. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 7 जिलों में कैंडिडेट नहीं उतारे थे. इनमें सारण, शिवहर, मुंगेर, भोजपुर, कैमूर, अरवल और जहानाबाद शामिल हैं.कांग्रेस का फोकस इस पर भी है कि चुनाव में उसका BJP से सीधा मुकाबला दिखे. कांग्रेस ने जितनी भी सीटें जीती हैं, वहां BJP और कांग्रेस का ही मुकाबला रहता है. कांग्रेस पिछली बार हारी 27 सीटों पर फिर चुनाव लड़ना चाहती है. इनमें 21 सीटें ऐसी हैं, जहां पिछली बार कांग्रेस और BJP के बीच मुकाबला था. मौजूदा सीटों के लिहाज से देखें तो 80% सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस का मुकाबला BJP से ही है.
कांग्रेस पार्टी मुस्लिम, दलित और पिछड़ा वर्ग को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस की सीनियर लीडरशिप समझ गई है कि अगर कांग्रेस को रिवाइव करना है, इन्हें अपने पाले में करना ही होगा. यही वजह है कि राहुल लगातार दलितों पर फोकस कर रहे हैं. कांग्रेस की कोशिश है कि वो पिछली बार से दोगुनी सीट जीते. ‘कांग्रेस सीमांचल और मिथिलांचल की जिन सीटों पर फोकस कर रही है, इनमें ज्यादातर मुस्लिम बहुल है. राहुल की वोटर अधिकार यात्रा में मुस्लिम बहुल इलाकों में अच्छा समर्थन मिला है. कांग्रेस इस चुनाव में अपना स्ट्राइक रेट बेहतर करना चाहती है.’
RJD कांग्रेस की डिमांड को आसानी से नहीं मानेगी. RJD चाहती है कि कांग्रेस वही सीटें ले, जहां RJD न जीत सके. कांग्रेस अड़ी है कि वो ज्यादा से ज्यादा ऐसी सीटें लें, जहां जीत सके.17 अगस्त से एक सितंबर तक चली राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा 23 जिलों से निकली थी. इनमें सीमांचल के कटिहार, पूर्णिया और अररिया कवर किए गए थे. इनके अलावा यात्रा सुपौल, मधुबनी और दरभंगा से भी गुजरी थी. पार्टी को उम्मीद है कि यात्रा में राहुल की मौजूदगी से इन जिलों में कांग्रेस के लिए माहौल बना है. यात्रा से कांग्रेस ने खुद को RJD के बराबर खड़ा कर लिया है. ‘यात्रा से कांग्रेस को फायदा हुआ है. हालांकि, ये फायदा संगठन के लेवल पर है, न कि चुनावी लेवल पर. बिहार में कांग्रेस का संगठन लगभग निष्क्रिय हो गया था. ग्राउंड लेवल पर तो संगठन खत्म हो चुका है. राहुल गांधी की यात्रा से पार्टी के बचे-खुचे कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिली है. यह ऊर्जा वोट में कितनी तब्दील होगी, यह कहना मुश्किल है.’