नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में कदम रखने की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। सालभर से चल रही इस चर्चा को उस वक्त नया बल मिल रहा है। जब जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी के हर कार्यकर्ता और नेता की इच्छा है कि निशांत अब राजनीति में आएं। यह टिप्पणी उन्होंने निशांत कुमार के साथ दिल्ली से पटना लौटते समय की, जहां दोनों संयोग से एक ही फ्लाइट में सफर कर रहे थे, जिससे राजनीतिक गलियारों में नए कयास लगाए जाने लगे हैं।
दरअसल, निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर उठती रही चर्चाओं के बीच इस बार माहौल कुछ अलग नजर आ रहा है। अब तक न खुद निशांत कुमार ने और न ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर खुलकर कुछ कहा है, लेकिन जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा का खुला बयान इस चर्चा को वजन देता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते उनकी बातों को महज अटकल कहकर खारिज करना आसान नहीं है, खासकर तब जब मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जेडीयू के शीर्ष नेताओं से नीतीश कुमार के भविष्य के राजनीतिक रोडमैप को लेकर सवाल किए हैं। वहीं, राजनीतिक गलियारों में यह भी बहस तेज है कि अगर निशांत राजनीति में आते हैं तो उनकी भूमिका क्या होगी। दोनों ही संभावनाओं के बीच सबसे अहम सवाल नीतीश कुमार की सहमति का है, जिन्होंने अब तक इस पूरे विषय पर चुप्पी साध रखी है। परिवारवाद के खिलाफ मुखर रहे नीतीश कुमार के राजनीतिक रुख को देखते हुए यह अटकल भी लगाई जा रही है कि उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन के दौरान इस तरह के फैसले की संभावना कम ही है।
नीतीश–निशांत की राजनीति को लेकर चल रही अटकलों में लालू प्रसाद यादव का जिक्र भले ही असंगत लगे, लेकिन राजनीतिक इतिहास इसे महत्व देता है। जब लालू को सजा के कारण सक्रिय राजनीति में सीमित रहने पर मजबूर होना पड़ा, उन्होंने अपने बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप की राजनीतिक लांचिंग करवाई और 2015 के विधानसभा चुनाव में इसका फायदा भी उठाया। अब चर्चा है कि अगर नीतीश कुमार भी रिटायरमेंट की दिशा में सोचते हैं, तो वे निशांत कुमार की ग्रैंड एंट्री इसी तरह कराएंगे। शायद सीधे सरकार में शामिल कर डिप्टी सीएम बनाएंगे, जबकि मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास रहेगा। यह आने वाले दिनों में बिहार की सियासत का बड़ा समीकरण बदल सकता है।