बिहार की राजनीति में चल रही सुगबुगाहटों के बीच गया जंक्शन पर दिल्ली जाने वाले यात्रियों और मजदूरों ने केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी है। यात्रियों का स्पष्ट कहना है कि यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में कदम रख रहे हैं, तो उन्हें रेल मंत्रालय की कमान सौंपी जानी चाहिए।
क्यों हो रही है यह मांग?
यात्रियों के अनुसार, नीतीश कुमार का पिछला रेल मंत्री का कार्यकाल ‘स्वर्ण काल’ की तरह था। उस समय न केवल सुरक्षा मानकों पर काम हुआ, बल्कि बिहार को कई नई ट्रेनों की- सौगात भी मिली थी। यात्री नीलेश कुमार ने एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करते हुए कहा कि पहले ट्रेनों में कम से कम 6 जनरल कोच होते थे, जो अब घटकर मात्र 2 रह गए हैं। इससे आम आदमी के लिए सफर करना सजा बन गया है। दिल्ली जा रहे जयंत कुमार का मानना है कि पर्व-त्योहारों के बाद बिहार से पलायन करने वाले मजदूरों की संख्या लाखों में होती है, लेकिन ट्रेनों की संख्या उस अनुपात में बेहद कम है। वहीं, उपेंद्र कुमार सिंह जैसे यात्रियों को उम्मीद है कि नीतीश कुमार का प्रशासनिक अनुभव रेलवे की जर्जर होती व्यवस्था और अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करने में कारगर साबित होगा।
गया जंक्शन पर मौजूद आम जनता का मानना है कि बिहार से बाहर काम की तलाश में जाने वाले मजदूरों के लिए ट्रेन ही एकमात्र सहारा है। ऐसे में यदि नीतीश कुमार को रेल मंत्रालय मिलता है, तो यह न केवल बिहार के लिए राजनीतिक जीत होगी, बल्कि लाखों यात्रियों के सफर को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी होगा। एक यात्री का कहना है कि “बिहार की जनता को नीतीश कुमार से काफी उम्मीदें हैं। उनका पिछला रिकॉर्ड बताता है कि वे रेलवे को बेहतर समझते हैं।”
यात्रियों की अपेक्षाएं;
| समस्या | यात्रियों की मांग/सुझाव |
| ट्रेनों में भीड़ | बिहार से दिल्ली और अन्य महानगरों के लिए स्पेशल ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए। |
| जनरल कोच | गरीब और मध्यम वर्ग के लिए जनरल डिब्बों की संख्या फिर से 6 या उससे अधिक की जाए। |
| सुविधाएं | रेल मंत्री के रूप में नीतीश कुमार बिहार के बुनियादी ढांचे और नई रेल लाइनों पर ध्यान दें। |