सदाकत आश्रम में सजा दही-चूड़ा का भोज, पर ‘माननीय’ कहां गायब? क्या बिहार कांग्रेस में होने वाला है कोई बड़ा ‘खेला’!…

Ritu Raj

बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़े फेरबदल की आहट सुनाई दे रही है। खबर कांग्रेस खेमे से है, जहाँ सोमवार को आयोजित परंपरागत ‘दही-चूड़ा भोज’ ने पार्टी के भीतर गहरी दरार के संकेत दे दिए हैं। पटना स्थित कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय, सदाकत आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम से पार्टी के 6 विधायकों की रहस्यमयी दूरी ने ‘ऑपरेशन लोटस’ या पाला बदलने की चर्चाओं को हवा दे दी है।

मकर संक्रांति के अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में भव्य दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था। सदाकत आश्रम में कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं का जमावड़ा तो लगा, लेकिन सबकी नजरें उन विधायकों को तलाशती रहीं जो इस आयोजन से नदारद थे। पार्टी के 6 विधायकों का एक साथ न आना महज इत्तेफाक नहीं माना जा रहा है। वरिष्ठ नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने इस दौरान सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नफरत के माहौल को खत्म करने और मनरेगा जैसे जनहित के मुद्दों पर अभियान चलाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, विधायकों की अनुपस्थिति पर वे भी किसी ठोस जवाब से बचते दिखे।

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क्या कांग्रेस में होने वाली है बड़ी टूट?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विधायकों की यह बेरुखी पार्टी से उनके मोहभंग का नतीजा हो सकती है। बिहार में जिस तरह के समीकरण बन रहे हैं, उसे देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि ये विधायक किसी अन्य गठबंधन या दल के संपर्क में हो सकते हैं। वहीं, पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने का यह एक संगठित तरीका हो सकता है। साथ ही अगर ये 6 विधायक अलग होते हैं, तो यह बिहार में कांग्रेस के अस्तित्व के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा।

सियासी गलियारों में चर्चा तेज:
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस विधायकों की नाराजगी सामने आई है। पिछले कुछ समय से लगातार विधायक आधिकारिक कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं। अब मकर संक्रांति के इस ‘शुभ’ मौके पर विधायकों का गायब होना किसी ‘अशुभ से कम नहीं है।

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