सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में मंगलवार को एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक साथ नवनिर्वाचित स्पीकर प्रेम कुमार को सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाया। यह घटना न केवल संसदीय परंपरा को जीवित रखने का प्रतीक बनी, बल्कि इससे सत्ताधारी गठबंधन के बीच समन्वय और रिश्तों की गर्माहट भी साफ तौर पर नजर आई।
जब प्रोटेम स्पीकर द्वारा प्रेम कुमार का नाम घोषित किया गया, तब परंपरा के अनुसार नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने स्पीकर को सदन के आसन तक पहुँचाया। जैसे ही प्रेम कुमार आसन की ओर बढ़े, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अचानक उन्हें रुकने का इशारा किया। इसके बाद, तेजस्वी यादव के बाईं ओर पहुंचने पर नीतीश ने कहा, “अब बैठिए,” और फिर दोनों नेताओं ने मिलकर प्रेम कुमार का हाथ पकड़कर उन्हें आसन पर बैठाया। यह दृश्य राजनीति के कठोर वातावरण में रिश्तों की सहजता और स्नेह का प्रतीक बन गया।
यह दृश्य तब और भी खास हो गया जब सदन में एक साथ जय श्रीराम के उद्घोष के साथ माहौल गूंज उठा। यह मात्र एक औपचारिक संसदीय प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह एक भावनात्मक पल था, जिसने सत्ताधारी गठबंधन की एकजुटता को भी प्रदर्शित किया।
यह घटना उस दिन के सत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी, जहां तेजस्वी यादव ने भी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों, जैसे सम्राट चौधरी और रामकृपाल यादव से मिलकर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अच्छे रिश्तों की मिसाल पेश की। यह नजारा यह दर्शाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच व्यक्तिगत समझदारी और सम्मान अब भी कायम है।
इस छोटे से दृश्य ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में विरोध जरूरी है, लेकिन परंपरा, सम्मान और रिश्तों की अहमियत कहीं अधिक होती है।