मुजफ्फरपुर में दिखा राष्ट्रभक्ति का भव्य रूप: 1100 फीट लंबे तिरंगे के साथ सड़कों पर उतरा जनसैलाब

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
उत्तर बिहार की व्यापारिक राजधानी मुजफ्फरपुर में आज 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति का एक ऐसा महासैलाब उमड़ा, जिसे देख हर शहरवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। ‘मुजफ्फरपुर परिवार’ के बैनर तले युवाओं ने एकता और अखंडता का संदेश देते हुए 1100 फीट लंबी भव्य तिरंगा यात्रा निकाली। इस विशाल ध्वज को थामे जब सैकड़ों युवा सड़कों पर निकले, तो पूरा शहर ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

केसरिया, सफेद और हरे रंग में रंगा शहर
यह ऐतिहासिक यात्रा शहर के अखाड़ाघाट सिकंदरपुर रोड से गाजे-बाजे के साथ शुरू हुई। देशभक्ति के तरानों के बीच युवाओं का हुजूम हाथों में विशाल तिरंगा थामे सरैयागंज टावर, ऐतिहासिक बाबा गरीबस्थान मंदिर, हरिशभा चौक और कल्याणी चौक होते हुए गुजरा। 1100 फीट लंबे इस तिरंगे की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब यात्रा का अगला सिरा एक चौक पर था, तो पिछला हिस्सा काफी पीछे तक नजर आ रहा था। लोग अपने घरों की छतों और खिड़कियों से इस अद्भुत दृश्य को निहारते और फूलों की वर्षा करते नजर आए।

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‘ऑपरेशन सिंदूर’ और बिहार के गौरव का संगम
इस वर्ष की तिरंगा यात्रा की सबसे खास बात इसकी विशेष झांकियां रहीं। संस्था के संरक्षक आकाश कुमार सहनी के नेतृत्व में निकाली गई इस यात्रा को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम पर आधारित किया गया था। इस झांकी के माध्यम से भारतीय सेना की वीरता, अदम्य साहस और सरहदों पर दिए गए बलिदानों को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया। इसके अतिरिक्त, बिहार की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने के लिए पटना का गोलघर, शांति का प्रतीक भगवान बुद्ध और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भव्य मॉडलों को भी शामिल किया गया, जिसने युवाओं के बीच अपनी मिट्टी के प्रति गौरव का भाव जगाया।

युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का संकल्प
आकाश कुमार सहनी ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना और उनमें राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रज्वलित करना है। उन्होंने कहा, “1100 फीट लंबा यह तिरंगा सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि हमारी एकता का सूत्र है। हम चाहते हैं कि मुजफ्फरपुर का हर युवा अपने वीर शहीदों के बलिदान को याद रखे और देश के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।”

यात्रा का समापन पुनः अखाड़ाघाट रोड पर एक भव्य सभा के साथ हुआ, जहाँ सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया गया। इस आयोजन ने मुजफ्फरपुर के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।

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