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पटना: राजधानी पटना में सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाने का फैसला लिया है। शनिवार सुबह से ही कई इलाकों में बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हो गई है। अवैध कब्जा हटाने के लिए जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रेट, पुलिस बल और नगर निगम की टीमों को तैनात कर दिया है। प्रशासन के अनुसार, यह अभियान दीघा से लेकर कलेक्ट्रेट घाट तक चलेगा। गंगा पथ और नदी किनारे के जमींदारी बांध के बीच के इलाकों में सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किए गए हैं। कई लोगों ने पक्के मकान बना लिए हैं, जो पूरी तरह गैरकानूनी हैं।
सरकार ने आदेश दिया है कि 15 और 16 फरवरी को सभी अस्थायी और स्थायी अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया जाए। इस कार्य के लिए पटना के अपर जिला दंडाधिकारी (विधि व्यवस्था) ने मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी और सुरक्षा बलों की प्रतिनियुक्ति कर दी है। गंगा नदी किनारे गेट नंबर 93 से लेकर उत्तर जंगलीपीर तक चलने वाले इस अभियान को सफल बनाने के लिए पाटलिपुत्र अंचल अधिकारी, पटना सदर के राजस्व पदाधिकारी, नगर निगम के कार्यपालक अधिकारी और टास्क फोर्स को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन को आशंका है कि अवैध कब्जाधारी विरोध कर सकते हैं, इसलिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
अभियान के दौरान अमीन और राजस्व कर्मचारी भी मौजूद रहेंगे ताकि किसी भी व्यक्ति के दावे की मौके पर ही जांच की जा सके। प्रशासन किसी को भी मामले को लटकाने या कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने का मौका नहीं देना चाहता। पटना जिला प्रशासन ने 13 फरवरी से ही इस अभियान की शुरुआत कर दी थी, जिसमें कई पक्के मकान गिराए गए थे। सरकार ने गंगा नदी किनारे की असर्वेक्षित भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने का फैसला लिया है।
पटना के डीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि दीघा से कंगनघाट तक गंगा नदी की सरकारी भूमि पर कोई भी निजी दावा मान्य नहीं है। एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, इस क्षेत्र में कोई भी संरचना अवैध है और उसे हटाया जाएगा। सरकार की योजना सिर्फ जमीन खाली कराने तक सीमित नहीं है। वन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि खाली कराए गए इलाकों को सुरक्षित करने के लिए चारदीवारी बनाई जाए और वहां पौधारोपण किया जाए, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके।