लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर तीखी बहस जारी है। 16 और 17 अप्रैल को होने वाली इस 15 घंटे की चर्चा के केंद्र में सीटों की संख्या बढ़ाना और आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया है।

विधेयक के मुख्य प्रस्ताव;
सीटों की संख्या: लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
बंटवारा: राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें प्रस्तावित हैं।
महिला आरक्षण: कुल सीटों में से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
परिसीमन: सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए नया परिसीमन किया जाएगा।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव;
| पक्ष | नेता | मुख्य तर्क / आपत्तियां |
| सरकार (BJP) | अमित शाह / अर्जुन राम मेघवाल | संविधान संशोधन लोकहित में है। हमारे पास नीयत और नीति दोनों हैं। 17 अप्रैल शाम 4 बजे वोटिंग होगी। |
| कांग्रेस | गौरव गोगोई | सरकार 90% पुरानी बातें दोहरा रही है। सीटों की संख्या 850 कैसे तय हुई? इसे परिसीमन से न जोड़ें, सीधे लागू करें। |
| सपा | अखिलेश यादव | मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग की। |
| कांग्रेस | राजीव शुक्ला | हम आरक्षण के समर्थक हैं, लेकिन परिसीमन के जरिए संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने की साजिश का विरोध करते हैं। |
अमित शाह का पलटवार;
सपा की मुस्लिम आरक्षण की मांग पर गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा- “धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है। अगर समाजवादी पार्टी चाहती है, तो वह अपने कोटे की सभी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।” वहीं, शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान संशोधन के बाद उत्पन्न जरूरतों के कारण ये विधेयक साथ लाए गए हैं और विपक्ष केवल विरोध के लिए हंगामा कर रहा है।

राज्यसभा से जुड़ी अन्य जानकारी;
इसी बीच राज्यसभा में उपाध्यक्षों के पैनल का पुनर्गठन किया गया है, जो 15 अप्रैल से प्रभावी हो गया है। इसमें BJP से दिनेश शर्मा, एस फांगनोन कोन्याक, घनश्याम तिवारी और कांग्रेस से फूलो देवी नेताम के शामिल सदस्य हैं। इसके साथ ही AIADMK: एम. थंबीदुरई और BJD से सस्मित पात्रा शामिल है। वहीं, कल (17 अप्रैल) शाम 4 बजे इन बिलों पर मतदान (वोटिंग) की जाएगी, जिससे देश की संसदीय रूपरेखा और महिला प्रतिनिधित्व का भविष्य तय होगा।