सीएम नीतीश की पार्टी में भूमिहार चेहरा मजबूत! पूर्व सांसद अरुण कुमार JDU में शामिल

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल (यूनाइटेड) ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए भूमिहार समाज के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद अरुण कुमार को पार्टी में शामिल कर लिया है। सभी दलों का सफर तय करते हुए अरुण कुमार ने अपने बेटे ऋतुराज कुमार (सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता) के साथ जदयू में अपनी तीसरी पारी की शुरुआत की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में कई प्रमुख भूमिहार नेताओं के शामिल होने की खबरें सामने आ रही थीं, जिसने NDA की चिंता बढ़ा दी थी।

पटना स्थित जदयू के प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, और वरिष्ठ नेता विजय चौधरी की उपस्थिति में उन्हें सदस्यता दिलाई गई।

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पुराने सहयोगी की वापसी: झा और ललन सिंह ने किया स्वागत
जदयू के शीर्ष नेतृत्व ने अरुण कुमार और उनके बेटे ऋतुराज का गर्मजोशी से स्वागत किया। संजय झा ने मिलन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अरुण कुमार उनके पुराने सहयोगी रहे हैं और उनके आने से जहानाबाद ही नहीं पूरे मगध क्षेत्र में जनता दल यूनाइटेड को मजबूती मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता विकास को चुनेगी और सीएम नीतीश कुमार के काम पर वोट करेगी, जिससे इस बार फिर से एनडीए की सरकार बनेगी।

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि समता पार्टी के जमाने से ही अरुण बाबू हम लोगों के साथ रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता दल यूनाइटेड परिवार में उनका फिर से स्वागत है और उन्हें उचित मान सम्मान दिया जाएगा, जिसके वह हकदार हैं।

‘बे-रंग’ लौटे अरुण कुमार की तीसरी एंट्री
गौरतलब है कि पूर्व सांसद अरुण कुमार का जदयू में प्रवेश पहले 5 सितंबर को ही होना था। उस दिन जदयू कार्यालय में पूरी तैयारी थी और मगध क्षेत्र से बड़े प्रदर्शन की योजना थी, मगर यह कार्यक्रम अचानक रद्द कर दिया गया था। उस समय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि या तो ललन सिंह ने मंजूरी नहीं दी या फिर बिहार बंद के कारण कार्यक्रम टला। इस बीच, उनकी एंट्री की कोशिशों को ‘समाधि’ मिल गई थी। हालांकि, अब अंततः उनकी वापसी हो चुकी है, जो जदयू की तात्कालिक राजनीतिक आवश्यकता को दर्शाती है।

राजद के ‘भूमिहार प्रेम’ पर NDA का पलटवार
अरुण कुमार की यह वापसी बिहार की सियासी हकीकत के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राजद के छलके भूमिहार प्रेम ने नीतीश कुमार की आँखें खोल दीं। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले बाहुबली नेता सूरजभान सिंह, पूर्व सांसद वीणा देवी, चंदन सिंह, पूर्व विधायक राहुल शर्मा (जगदीश शर्मा के पुत्र), पूर्व विधायक नरेन्द्र सिंह उर्फ बोगो सिंह और परबत्ता के जदयू विधायक संजीव कुमार सिंह जैसे भूमिहार नेताओं ने राजद की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस घटनाक्रम ने NDA के प्रचारित नारे ‘भूरा बाल साफ करो’ को ही निरस्त कर डाला था।

जदयू ने अरुण कुमार को शामिल करके मगध क्षेत्र में भूमिहार समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और राजद की सेंधमारी का जवाब देने की कोशिश की है।

कौन हैं अरुण कुमार?
अरुण कुमार एक अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने नीतीश कुमार से पहले ही लोकसभा के दरवाजे पर दस्तक दी थी। वह 1999 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में जहानाबाद के सांसद रहे। 2014 में उन्होंने राष्ट्रीय लोक समता सेकुलर (NDA का घटक दल) की ओर से जहानाबाद सीट से चुनाव लड़ा और सोलहवीं लोकसभा में सांसद बने। उन्होंने अपनी भारतीय सब लोग पार्टी का गठन किया और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। हाल ही में, वह लोक जनशक्ति पार्टी को छोड़कर बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए थे और जहानाबाद लोकसभा 2024 का चुनाव लड़े, जिसमें उन्हें हार मिली थी। अब उनकी जदयू में वापसी बिहार की जातीय राजनीति में एक नया अध्याय लिखती है।

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