बिहार चुनाव में हार के बाद मुकेश सहनी का बड़ा खुलासा: बताया क्यों ‘फेल’ हुआ महागठबंधन और एनडीए में जाने पर क्या बोले?

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद सियासी हलचल तेज है। हार की समीक्षा के बीच विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने एक बेबाक इंटरव्यू में गठबंधन की हार के कारणों और भविष्य की रणनीति पर खुलकर बात की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हार किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे महागठबंधन की सामूहिक विफलता है।

हार का मुख्य कारण: NDA की ‘कैश स्कीम’
मुकेश सहनी ने हार के पीछे आर्थिक समीकरणों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान एनडीए सरकार द्वारा सीधे बैंक खातों में पैसे भेजना गेम-चेंजर साबित हुआ। उन्होंने कहा, “1 करोड़ 45 लाख महिलाओं को ‘माई-बहिन योजना’ के तहत 10-10 हजार रुपये बांटना और 78 लाख युवाओं को 5-5 हजार रुपये देना हार का सबसे बड़ा कारण बना।” सहनी के अनुसार, जनता ने वर्तमान में मिल रहे नकद पैसे पर ज्यादा भरोसा किया, जबकि महागठबंधन की ‘सरकार बनने पर 2 लाख रुपये देने’ की घोषणा को लोगों ने भविष्य की बात मानकर उतनी तवज्जो नहीं दी।

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वोट शेयर और MY समीकरण में सेंध
चुनाव आंकड़ों पर बात करते हुए सहनी ने कहा कि महागठबंधन को 38% वोट मिले, जो उनकी उम्मीदों से अधिक थे, लेकिन एनडीए का 46% वोट शेयर भारी पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि पारंपरिक ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण में बड़ी सेंधमारी हुई है, जो चुनाव परिणामों में साफ दिखाई दी। साथ ही, उन्होंने डिप्टी सीएम के चेहरे को लेकर चल रहे विवाद पर कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए भी यह पद तय था, लेकिन विरोधियों ने इसे गलत तरीके से पेश कर नैरेटिव बदल दिया।

BJP के ऑफर और प्रशांत किशोर पर राय
भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर विराम लगाते हुए सहनी ने तल्ख लहजे में कहा, “बीजेपी के पास ऑफर हमेशा रहता है, लेकिन मैं कतई वहां नहीं जाऊंगा। बीजेपी उन्हें ही पूछती है जो लेने लायक होते हैं, वरना वह किसी को तवज्जो नहीं देती।”

वहीं, जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) और प्रियंका गांधी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि पीके एक कुशल रणनीतिकार हैं। यदि वे ‘इंडिया’ ब्लॉक या राहुल गांधी के साथ मिलकर काम करते हैं, तो इससे गठबंधन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने माना कि पीके के अनुभव का लाभ गठबंधन के भविष्य के लिए सकारात्मक हो सकता है।

गठबंधन का भविष्य
कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के बयानों पर सहनी ने कहा कि लोकतंत्र में सबको बोलने का हक है, लेकिन अंततः शीर्ष नेतृत्व का फैसला ही मान्य होगा। उन्होंने संकेत दिया कि हार के बावजूद महागठबंधन को एकजुट रहकर आगे की रणनीति बनानी होगी।

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