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सीमांचल में AIMIM की सक्रियता से बढ़ी महागठबंधन की चुनौती.

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सिटी पोस्ट लाइव : एआइएमआइएम ने महागठबंधन के नेताओं की चिंता बढ़ा दी है.एआइएमआइएमके अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता सिमांचल में बढ़ जाने से नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की चिंता बढ़ गई है. ओवैसी ने एआइएमआइएम के पांच में से चार विधायकों को राजद में सम्मिलित कराने को मुद्दा बनाकर महागठबंधन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है.ओवैसी सीधे-सीधे महागठबंधन के वोट बैंक को लक्ष्य बनाकर लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं.

एआइएमआइएम का सीधे-सीधे निशाना सीमांचल में कांग्रेस के हिस्से में जाने वाली लोकसभा सीटों पर है.ओवैसी, राजद और कांग्रेस के वंशवाद की चर्चा करना नहीं भूलते हैं. चार जिलों (किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार) वाले सीमांचल में मुसलमानों के पिछड़ेपन के लिए नीतीश को उत्तरदायी ठहरा रहे हैं.2020 के विधानसभा चुनाव में एआइएमआइएम ने सीमांचल में पांच सीटें जीत ली थीं. उस परिणाम से उत्साहित ओवैसी फिर से सीमांचल की कुछ लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में जुट गए हैं.

ओवैशी को प्रत्याशी ढूंढने में भी परेशानी नहीं होगी, क्योंकि महागठबंधन के घटक राजद-जदयू-कांग्रेस के टिकट से वंचित दावेदार एआइएमआइएम का दामन थाम सकते हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में किशनगंज लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले बहादुरगंज व कोचाधामन विधानसभा क्षेत्रों में प्राप्त मतों के लिहाज से एआइएमआइएम पहले पायदान पर रही थी.

पसमांदा मुसलमानों को लक्ष्य बनाकर भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में गोलबंदी की तैयारी कर रही है. इसके लिए वह मुसलमानों के अगड़े वर्ग को सीधे निशाने पर ले रही है.वह सेखड़ा, ठकुराई, शेरशाहबादी, कुल्हैया, सुरजापुरी तथा मलिक बिरादरी को पसमांदा की हकमारी के लिए उत्तरदायी ठहरा रही है.पिछले दिनों भाजपा के बैनर तले पूर्व मंत्री भीम सिंह ने तो बकायदा अगड़ी जाति के मुसलमानों व राज्य सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया था.भाजपा इस प्रकरण को आने वाले दिनों में और तूल देने की तैयारी में है.

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