खाड़ी देशों में तनाव के बीच भारत की ‘एनर्जी लाइफलाइन’ बने शिवालिक और नंदा देवी, जानें कैसे पहुंचती है आपकी रसोई तक गैस…

Ritu Raj

जब हम नीले समंदर की लहरों पर ‘शिवालिक’ या ‘नंदा देवी’ जैसे जहाजों को देखते हैं, तो वे केवल लोहे के विशाल ढांचे नहीं होते, बल्कि करोड़ों भारतीय घरों की रसोई में जलने वाली आग का भरोसा होते हैं। भू-राजनीतिक तनाव के बीच, इन जहाजों का सुरक्षित भारतीय तटों तक पहुँचना किसी बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत से कम नहीं है।

आंकड़ों का जादू;
एक VLGC (Very Large Gas Carrier) की क्षमता को अगर हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर देखें, तो आंकड़े किसी को भी हैरान कर सकते हैं। एक औसत वीएलजीसी जहाज (लगभग 55,000 टन क्षमता) अपने साथ इतना ईंधन लाता है कि उससे 32.4 लाख (3.24 मिलियन) घरेलू सिलेंडर भरे जा सकें। महज दो ऐसे जहाज पूरे भारत की एक दिन की गैस खपत को अकेले संभालने का दम रखते हैं। हाल ही में मुंद्रा और कांडला पहुंचे ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ मिलकर करीब 92,712 टन एलपीजी लाए हैं, जो भारत की गैस पाइपलाइन के लिए ‘संजीवनी’ की तरह है।

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गैस को तरल क्यों बनाया जाता है?
गैस को उसके गैसीय रूप में ढोना असंभव है क्योंकि वह बहुत ज्यादा जगह घेरती है। इसके लिए वैज्ञानिक तकनीक का सहारा लिया जाता है। गैस को अत्यधिक ठंडे तापमान पर तरल (Liquid) में बदला जाता है। इससे उसका आयतन सैकड़ों गुना कम हो जाता है। जहाजों के भीतर विशालकाय ‘थर्मस’ जैसे टैंक होते हैं जो बाहरी गर्मी को अंदर नहीं आने देते, जिससे गैस तरल अवस्था में बनी रहती है। ‘हारजंद’ जैसे आधुनिक जहाज अब 93,000 क्यूबिक मीटर क्षमता के साथ आते हैं, जो न सिर्फ गैस ढोते हैं बल्कि खुद भी स्वच्छ ईंधन पर चलते हैं।

जहाजों की श्रेणियां और उनकी भूमिका;

श्रेणीक्षमता (क्यूबिक मीटर)मुख्य उपयोग
फुली प्रेशराइज्ड5,000 – 6,000छोटी दूरी और तटीय व्यापार
सेमी-रेफ्रिजरेटेड5,000 – 20,000मध्यम दूरी का परिवहन
मिड-साइज25,000 – 50,000क्षेत्रीय गैस आपूर्ति
VLGC50,000 – 93,000+अंतरराष्ट्रीय लंबी यात्राएं (भारत की मुख्य पसंद)
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