बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की करारी शिकस्त के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर का घमासान अब सार्वजनिक हो चुका है। शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को एक तरफ तेजस्वी यादव हार के कारणों को खोजने के लिए सांसदों के साथ बैठक कर रहे थे, तो दूसरी तरफ उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर तीखे बाण छोड़कर पार्टी के भीतर मची खलबली को हवा दे दी है।

रोहिणी का कड़ा प्रहार;
रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका निशाना साफ तौर पर तेजस्वी के सलाहकार और उनके करीबी सर्कल पर था। उन्होंने लिखा:”समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी ‘खुद’ आत्ममंथन करने और जिम्मेदारी लेने की है। ‘अपने’ इर्द-गिर्द कब्जा जमाए बैठे चिह्नित ‘गिद्धों’ को ठिकाने लगाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की समीक्षा की सार्थकता साबित होगी। बाकी तो ये जो पब्लिक है न, वो सब जानती-समझती ही है…”
हालांकि, रोहिणी का यह बयान सीधे तौर पर तेजस्वी यादव की कार्यशैली और उनके निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल खड़ा करता है। वही,इससे पहले भी रोहिणी ने तेजस्वी के खास सिपहसालार संजय यादव और रमीज की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस बार उन्होंने ‘गिद्ध’ शब्द का प्रयोग कर नाराजगी की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। चुनाव नतीजों के तुरंत बाद लालू परिवार में हुई अनबन के बाद रोहिणी ने घर छोड़ दिया था। उनका ताजा पोस्ट दर्शाता है कि हार का जख्म और आपसी दूरियां अभी भरी नहीं हैं।

RJD के लिए आगे की राह मुश्किल?
पार्टी के भीतर से उठी यह आवाज तेजस्वी यादव के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रही है। एक तरफ उन्हें चुनाव में मिली हार के बाद संगठन को फिर से खड़ा करना है, वहीं दूसरी तरफ परिवार और पार्टी के पुराने वफादारों के बीच बढ़ रहे असंतोष को शांत करना है।