नीतीश कुमार से मिले अनंत सिंह के बेटे, क्या अंकित-अभिषेक की होगी औपचारिक सियासी एंट्री?

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की सियासत में ‘बाहुबली’ और ‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह के परिवार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मोकामा विधानसभा सीट के समीकरणों के बीच एक ऐसी तस्वीर उभरी है जिसने राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है। अनंत सिंह की पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी अपने दोनों बेटों, अंकित और अभिषेक के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुंचीं। इस मुलाकात के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या जेल में बंद अनंत सिंह की रिहाई की राह आसान होगी या फिर मोकामा की विरासत अब अगली पीढ़ी के हाथों में जाने वाली है।

50 गाड़ियों का काफिला और पिता वाली ‘ठसक’
मोकामा विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों नजारा कुछ बदला-बदला सा है। अनंत सिंह फिलहाल एक हत्याकांड मामले में जेल में बंद हैं, लेकिन उनके जुड़वां बेटों ने मैदान संभाल लिया है। करीब 50 गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ जब अंकित और अभिषेक गांवों का दौरा करते हैं, तो समर्थकों का जोश सातवें आसमान पर होता है। ग्रामीणों के बीच उनका बातचीत का अंदाज, जनता से सीधा संवाद और वही पुरानी ‘ठसक’ लोगों को अनंत सिंह के सुनहरे दिनों की याद दिला रही है।

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‘छोटे सरकार’ से ‘अंकित-अभिषेक भैया’ तक का सफर
मोकामा की गलियों में अब नारे भी बदल रहे हैं। जो समर्थक कभी ‘छोटे सरकार जिंदाबाद’ के नारे लगाते थे, वे अब ‘अंकित भैया’ और ‘अभिषेक भैया’ के समर्थन में आवाज बुलंद कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों भाइयों के साथ वही पुराने रणनीतिकार और कट्टर समर्थक नजर आ रहे हैं, जो दशकों से अनंत सिंह की असली ताकत रहे हैं। लंदन में पढ़ाई कर चुके ये दोनों युवा नेता अब गांव-गांव जाकर लोगों का हाल-चाल जान रहे हैं और बुजुर्गों का आशीर्वाद ले रहे हैं।

अनंत सिंह के उस पुराने बयान के क्या हैं मायने?
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान जब अनंत सिंह से बेटों की राजनीति में एंट्री पर सवाल हुआ था, तो उन्होंने अपने खास मगही अंदाज में कहा था— “अभी लड़कवा के उम्र नय हय, अगला बेरी हो जतय त लड़तय। अब हमरा उम्र हो गेले हय।” उनके इस बयान से साफ था कि उन्होंने अपनी विरासत की रूपरेखा पहले ही तैयार कर ली थी। अब मुख्यमंत्री से हुई यह मुलाकात और क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता इसी ओर इशारा कर रही है कि मोकामा की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने वाली है।

फिलहाल, सबकी नजरें न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं, लेकिन मोकामा की जनता के बीच यह चर्चा आम है कि ‘छोटे सरकार’ की राजनीतिक मशाल अब उनके बेटों ने थाम ली है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह केवल जनसंपर्क है या फिर किसी बड़े चुनावी धमाके की तैयारी।

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