बिहार विधानसभा: क्या फिर से चमकेगा RJD लगाएगा जीत की हैट्रिक या NDA रचेगा 40 साल बाद इतिहास?

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव

जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आ रहा है, सारण जिले की मढ़ौरा विधानसभा सीट पर सियासी तापमान तेजी से बढ़ रहा है। यह सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गई है। एनडीए जहां इस बार अपनी हार की परंपरा को तोड़ने की कोशिश में जुटा है, वहीं राजद (RJD) चौथी बार जीत का परचम लहराने को तैयार है।

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मढ़ौरा में राजग (एनडीए) का ट्रैक रिकॉर्ड काफी कमजोर रहा है। 1980 से अब तक राजग गठबंधन को इस सीट पर जीत नसीब नहीं हुई है। भाजपा और जदयू ने अलगअलग समय पर कई चेहरे आजमाए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। 1980 में भाजपा के महेश्वर सिंह तीसरे स्थान पर रहे, 1990 में बलिराम राय अंतिम स्थान पर, और 1995 में कृष्णकांत ओझा सातवें स्थान तक सिमट गए।

2000 में समता पार्टी ने पूर्व विधायक सुरेंद्र शर्मा को टिकट दिया, लेकिन वो भी दूसरे स्थान पर रह गए। 2005 में दो बार हुए चुनाव में भी भाजपा और जदयू को हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि 2005 में जदयू ने जितेंद्र कुमार राय को टिकट दिया था, जो अब राजद में शामिल होकर तीन बार लगातार विधायक बने हैं।

2010, 2015 और 2020 में भी एनडीए ने उम्मीदवार बदले लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। 2020 में जदयू जिलाध्यक्ष अल्ताफ अहमद राजू को उतारा गया, लेकिन जनता ने फिर से राजद के जितेंद्र कुमार राय पर भरोसा जताया।

 राजग की बड़ी चुनौतियां

एनडीए की सबसे बड़ी समस्या स्थायी नेतृत्व की कमी और बारबार प्रत्याशी बदलना रही है। किसी भी उम्मीदवार को जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाने का मौका नहीं मिला। संगठन की कमजोरी और आपसी तालमेल की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए।

 राजद की पकड़ बरकरार

वहीं राजद ने लगातार तीन चुनावों से जितेंद्र कुमार राय को ही टिकट दिया और हर बार जीत हासिल की। उनकी स्थानीय लोकप्रियता, क्षेत्र में लगातार उपस्थिति और संगठन से मजबूत तालमेल ने उन्हें मजबूत उम्मीदवार बना दिया है। वे राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं, जिससे उनके प्रभाव में और इजाफा हुआ है।

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