मतदान के दिनों में हर कोई बूथ तक पहुंचकर वोट नहीं डाल पाता। ऐसे मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने पोस्टल बैलेट पेपर की व्यवस्था की है, जिससे वे घर बैठे या ड्यूटी स्थल से ही मतदान कर सकते हैं। आमतौर पर इस श्रेणी में सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस बल, चुनावी ड्यूटी पर तैनात अधिकारी-कर्मचारी, वरिष्ठ नागरिक (80 वर्ष से अधिक आयु वाले) और दिव्यांग मतदाता शामिल होते हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य है कि कोई भी नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे और हर वोट लोकतंत्र को मजबूती दे सके।
दरअसल, पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) एक विशेष प्रकार का मतदान पत्र है, जिसके जरिए कुछ खास श्रेणी के मतदाता घर बैठे बिना पोलिंग बूथ पर जाए अपने स्थान पर रहकर वोट डाल सकते हैं। यह सुविधा उन लोगों के लिए है जो मतदान के दिन बूथ पर उपस्थित नहीं हो सकते।
पोस्टल बैलेट कैसे काम करता है?
आवेदन: पात्र मतदाता को फॉर्म 12D भरकर चुनाव अधिकारी को आवेदन करना होता है।
बैलेट पेपर मिलता है: चुनाव आयोग पोस्ट या हैंड डिलीवरी से बैलेट पेपर भेजता है।
वोट डालना: मतदाता गोपनीय रूप से बैलेट पर निशान लगाता है।
लौटाना: भरा हुआ बैलेट एक विशेष लिफाफे में सील करके निर्धारित समय में लौटाना होता है।
गिनती: मतदान के बाद पोस्टल बैलेट को अन्य वोटों के साथ गिना जाता है।
हालांकि, पोस्टल बैलेट व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र मतदाता अपनी स्थिति या जिम्मेदारी के कारण मतदान से वंचित न रहे। यह प्रणाली न सिर्फ लोकतंत्र की पहुंच को विस्तृत करती है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को और अधिक समावेशी, पारदर्शी और भागीदारीपूर्ण बनाती है। आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में भी यह व्यवस्था कई मतदाताओं के लिए लोकतंत्र में अपनी हिस्सेदारी निभाने का एक सशक्त माध्यम साबित होगी।