बिहार चुनाव 2025: महागठबंधन में ‘सीट युद्ध’, दोस्ताना मुकाबलों ने एनडीए की राह की आसान

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग नजदीक है, लेकिन महागठबंधन (INDIA गठबंधन) अभी तक सीट बंटवारे के पेंच में उलझा हुआ है। राजद, कांग्रेस, भाकपामाले और वीआईपी जैसी घटक दलों के बीच विचारों की एकता तो है, पर सीटों पर सहमति नहीं बन पा रही है। परिणामस्वरूप कई सीटों पर एक ही गठबंधन के दलों के बीच दोस्ताना मुकाबले शुरू हो गए हैं, जिससे एनडीए को अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा फायदा मिल सकता है।

खबर है कि कम से कम 10 विधानसभा सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार आपस में भिड़ते नजर आ रहे हैं, जैसे कि वैशाली, तारापुर, कुटुंबा आदि प्रमुख सीटों पर। इन सीटों पर राजद उम्मीदवार कांग्रेस या वीआईपी के प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में हैं। यह स्थिति गठबंधन के अंदर बढ़ती असहमति और अव्यवस्था को दर्शा रही है।

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पिछले हफ्ते कांग्रेस ने अपनी पहली सूची में 48 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए थे, जबकि बाकी दलों के बीच नामों को लेकर खींचतान चलती रही। इससे गठबंधन की संगठनात्मक कमजोरी भी उजागर हुई है।

गठबंधन में शामिल वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी की नाराजगी भी खुलकर सामने आई। उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला करते हुए केवल अपनी पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करने की घोषणा की। पहले उन्होंने महागठबंधन से नाता तोड़ने की धमकी दी थी, लेकिन बाद में भाकपामाले के दीपंकर भट्टाचार्य और राहुल गांधी की बातचीत के बाद उन्होंने रुख नरम किया।

हालांकि, यह तत्कालिक सुलह गठबंधन में मौजूद गहरी अस्थिरता और मतभेदों को नहीं छुपा सकी। मुकेश सहनी की उपमुख्यमंत्री पद की आकांक्षा, राजद के साथ उनके रिश्तों में तनाव का संकेत देती है। इससे साफ है कि महागठबंधन में एकजुटता के बजाय व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं हावी हैं, जो भाजपा और एनडीए के लिए राजनीतिक अवसर बन सकती हैं।

इस सियासी भ्रम और आपसी कलह ने एनडीए को एक संगठित और स्पष्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ने का मौका दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या महागठबंधन समय रहते एकजुट हो पाता है या यह अंदरूनी लड़ाई उन्हें राजनीतिक नुकसान की ओर ले जाएगी।

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