बिहार चुनाव 2025: महागठबंधन में ‘अकेले चलो’ की राह पर VIP, मुकेश सहनी ने जारी की 11 प्रत्याशियों की सूची

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। एक तरफ जहां राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अनिश्चितता और गतिरोध अब भी बरकरार है, वहीं विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने अपनी स्वतंत्र चुनावी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। मुकेश सहनी के नेतृत्व वाली वीआईपी ने इस सूची में 5 नए प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं, जिससे पार्टी द्वारा अब तक मैदान में उतारे गए कुल उम्मीदवारों की संख्या 11 हो गई है।  

वीआईपी की दूसरी सूची में प्रमुख चेहरे:

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वीआईपी की ओर से जारी दूसरी सूची में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद को चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा, सुगौली सीट से मनोज सहनी, बिहपुर सीट से अर्पणा कुमारी मंडल, केसरिया से वरुण विजय, और कटिहार से सौरभ अग्रवाल को चुनावी मैदान में उतारा गया है।  

अब तक 11 सीटों पर प्रत्याशी घोषित:

इससे पहले, वीआईपी ने अपनी पहली सूची में 6 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की थी। इस तरह, पार्टी ने कुल 11 सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है:

पार्टी में टूट: भाजपा में शामिल हुए प्रमुख नेता

उम्मीदवारों की घोषणा के बीच ही, वीआईपी को एक बड़ा झटका लगा है। टिकट वितरण के बावजूद, पार्टी के भीतर दलबदल का सिलसिला जारी है। वीआईपी के प्रदेश प्रवक्ता राजेश सहनी, बिट्टू पासवान और पूर्व प्रमुख राजेश प्रजापति समेत कई नेता अपने समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए। इन नेताओं ने एनडीए की जीत सुनिश्चित करने की शपथ ली है, जिसे वीआईपी के लिए एक महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।

चुनावी कार्यक्रम पर एक नजर:

बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं। पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया सोमवार को समाप्त हो रही है। इस चरण में कुल 243 सीटों में से 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होगा। पहले चरण में पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज और भोजपुर जैसे महत्वपूर्ण जिले शामिल हैं। नामांकन पत्रों की जांच मंगलवार को होगी और नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर है। वहीं, दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा और वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी। वीआईपी की यह सक्रियता महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर दबाव बनाने और अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का एक प्रयास है।

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