सीमांचल में जद(यू) को बड़ा झटका! मास्टर मुजाहिद 28 जुलाई को थामेंगे राजद का दामन, तेजस्वी यादव की बढ़ेगी ताकत

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। सीमांचल क्षेत्र में जनता दल (यूनाइटेड) के एक बड़े चेहरे और पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद 28 जुलाई को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल होने जा रहे हैं। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए सीमांचल में एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली राजद की स्थिति इस क्षेत्र में मजबूत होगी।

मास्टर मुजाहिद का जद(यू) से इस्तीफा और राजनीतिक मुलाकातें
मास्टर मुजाहिद, जो पिछली लोकसभा चुनाव में जद(यू) के उम्मीदवार भी रहे थे, ने कुछ दिन पहले ही जनता दल (यूनाइटेड) से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे का मुख्य कारण वक्फ बिल का पार्टी द्वारा समर्थन किया जाना बताया जा रहा है, जिसका उन्होंने कड़ा विरोध किया था। जद(यू) छोड़ने के बाद, उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी हुई थी और दोनों के बीच बातचीत भी हुई थी, जिससे कयास लगाए जा रहे थे कि शायद कोई समाधान निकल सके।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

हालांकि, इन कयासों पर विराम तब लग गया, जब बुधवार देर रात मास्टर मुजाहिद ने राजद नेता तेजस्वी यादव से शिष्टाचार मुलाकात की। इस मुलाकात की सामने आई तस्वीरों ने बिहार की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

28 जुलाई को सीमांचल में तेजस्वी, राजद में शामिल होंगे मुजाहिद
सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव 28 जुलाई को सीमांचल का दौरा करने वाले हैं। प्रबल संभावना है कि इसी दिन, मास्टर मुजाहिद अपने कई समर्थकों और स्थानीय नेताओं के साथ औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जनता दल की सदस्यता ग्रहण करेंगे। मास्टर मुजाहिद को सीमांचल में मुस्लिम समुदाय और आम जनता के बीच एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। उनकी जनाधार और जमीनी पकड़ जद(यू) के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रही है।

उनके राजद में शामिल होने से सीमांचल की राजनीति पर गहरा असर पड़ना तय है। यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है और राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जाता है। मास्टर मुजाहिद के दलबदल से जद(यू) को अल्पसंख्यक वोटों में सेंध लगने का खतरा है, जबकि राजद को इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलेगा, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। यह घटनाक्रम निश्चित रूप से बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म देगा और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होने की संभावना है।

Share This Article