Bihar Politics: राजद में ‘तेजस्वी युग’ की औपचारिक शुरुआत! कार्यकारी अध्यक्ष बनते ही गिर सकती है कई दिग्गजों पर गाज

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ी हलचल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर देखने को मिल रही है। सियासी गलियारों में यह खबर पुख्ता मानी जा रही है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को राजद का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा रहा है। 25 जनवरी को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। यह फैसला राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के गिरते स्वास्थ्य और भविष्य की चुनावी रणनीतियों को देखते हुए लिया जा रहा है।

25 जनवरी को हो सकती है औपचारिक घोषणा
सूत्रों के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव को डॉक्टरों ने तनाव से दूर रहने की सलाह दी है, जिसके कारण वे सक्रिय राजनीति में उतनी दौड़-धूप नहीं कर पा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, बीजेपी और जेडीयू की तर्ज पर राजद में भी अब कार्यकारी अध्यक्ष की परंपरा शुरू होने जा रही है। तेजस्वी यादव फिलहाल अघोषित रूप से पार्टी के सारे फैसले ले रहे हैं, लेकिन पद मिलने के बाद वे पूरी आधिकारिक शक्ति के साथ संगठन में आमूल-चूल परिवर्तन कर सकेंगे।

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तेजस्वी के ‘4 बड़े फैसले’ जिनसे मचेगा हड़कंप
कार्यकारी अध्यक्ष का पद संभालते ही तेजस्वी यादव चार बड़े और कड़े फैसले लेने की तैयारी में हैं, जो पार्टी के पुराने ढांचे को हिलाकर रख सकते हैं:

• भितरघातियों पर बड़ी कार्रवाई: प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने 300 ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट सौंपी है जिन्होंने चुनाव में पार्टी विरोधी काम किया। तेजस्वी इन पर निष्कासन की गाज गिरा सकते हैं।

• पार्टी कार्यालय से होगा संचालन: अब तक तेजस्वी अपने आवास से ही गतिविधियां चलाते थे, लेकिन अब वे नियमित रूप से राजद कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और संगठन की सीधी निगरानी करेंगे।

• प्रदेश अध्यक्ष की विदाई संभव: संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष को बदला जा सकता है। उनकी जगह किसी नए और युवा चेहरे को कमान सौंपी जा सकती है।

• प्रधान महासचिव की छुट्टी: सूत्रों का दावा है कि पार्टी के प्रधान महासचिव के पद पर भी फेरबदल तय है। तेजस्वी अपनी नई टीम में उन लोगों को जगह देना चाहते हैं जो 2025-26 के चुनावी मोड में फिट बैठें।

लालू यादव का 28 साल का एकाधिकार
5 जुलाई 1997 को राजद के गठन के बाद से लालू प्रसाद यादव लगातार 13 बार से निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाते रहे हैं। जून 2025 में ही उन्हें दोबारा 2028 तक के लिए अध्यक्ष चुना गया था। हालांकि, अब कमान धीरे-धीरे तेजस्वी के हाथों में जा रही है, जो इस बात का संकेत है कि राजद अब पूरी तरह से ‘युवा नेतृत्व’ की ओर कदम बढ़ा चुका है।

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