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बिहार की राजधानी पटना के सबसे हाई-प्रोफाइल पते ’10 सर्कुलर रोड’ यानी राबड़ी आवास पर बीती रात हुई हलचल ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। रात के अंधेरे में आवास से पौधे, गमले और अन्य सामान बाहर निकाले जाने की घटना पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा प्रहार किया है। बीजेपी ने इसे पारदर्शी राजनीति के खिलाफ बताते हुए लालू परिवार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
रात का अंधेरा और सामान की शिफ्टिंग: क्या छिपा रही है राजद?
बिहार भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकारी आवास खाली करना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसे रात के सन्नाटे में करना कई संदेह पैदा करता है। पटेल ने तीखा हमला करते हुए कहा, “अगर सब कुछ नियमों के अनुसार और पारदर्शी था, तो सामान दिन के उजाले में क्यों नहीं निकाला गया? रात की चुप्पी और यह जल्दबाजी साफ संकेत देती है कि दाल में कुछ काला है।”
“उजाले से डरना लोकतांत्रिक आचरण नहीं”
बीजेपी प्रवक्ता ने लालू परिवार पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग दशकों तक बिहार की सत्ता के शीर्ष पर रहे, आज उन्हें उजाले से डर लग रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शुचिता और पारदर्शिता की उम्मीद की जाती है, लेकिन अंधेरे में चोरी-छिपे सामान ले जाना यह बताता है कि पर्दे के पीछे कुछ ऐसा है जिसे जनता से छिपाने की कोशिश की जा रही है। पटेल के अनुसार, यह कृत्य लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है।
चुनावी हार और सत्ता के अहंकार पर प्रहार
बीजेपी ने राजद की हालिया विधानसभा चुनाव में हुई करारी हार को भी इस घटना से जोड़ा। प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि जिनके कार्यकाल में परिवारवाद, भ्रष्टाचार और अहंकार का बोलबाला रहा, जनता ने उन्हें उनकी सही जगह दिखा दी है। अब ये लोग सच्चाई के प्रकाश से बचना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार की जनता अब जागरूक हो चुकी है और वह अंधेरे में रची जाने वाली साजिशों को बखूबी समझती है।
पारदर्शिता बनाम पुरानी आदतें
बीजेपी ने अपने बयान में जोर दिया कि बिहार अब विकास और जवाबदेही की राजनीति की ओर बढ़ चुका है। पटेल ने अंत में कहा कि जो नेता या दल उजाले से भागता है, वह सत्ता के योग्य नहीं हो सकता। यही कारण है कि जनता ने ऐसी शक्तियों को हाशिए पर धकेल दिया है। फिलहाल, राबड़ी आवास से सामान शिफ्टिंग की यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं और सियासी गलियारों में बहस का केंद्र बनी हुई हैं।