बिहार राज्यसभा चुनाव: तेजस्वी की ‘मटन पार्टी’ से गायब हुए AIMIM-BSP विधायक, क्या फंस जाएगा राजद का गेम?…

Ritu Raj

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब एक दिलचस्प सियासी जंग में तब्दील हो चुका है। जहाँ शुरुआत में यह प्रक्रिया निर्विरोध होने की उम्मीद थी, वहीं छठवें उम्मीदवार के मैदान में आने से अब जोड़-तोड़ और संख्या बल का खेल शुरू हो गया है।

संख्या बल का गणित और NDA का दावा;
बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति के अनुसार, एनडीए (बीजेपी, जदयू और सहयोगी) अपने संख्या बल के आधार पर 4 सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित मान रहा है। लेकिन असली पेच 5वीं सीट को लेकर फंसा है। विपक्ष (महागठबंधन) के पास 2 सीटें थीं, जिन्हें बचाने के लिए उसे एकजुट रहने की जरूरत है। राजद ने अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को वोटिंग तक खींच लिया है। एनडीए का दावा है कि उनके पास अतिरिक्त वोट हैं और वे पांचों सीटें जीत सकते हैं।

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तेजस्वी की ‘मटन पॉलिटिक्स’ और विपक्षी एकजुटता;
वोटों के बिखराव को रोकने के लिए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को अपने आवास पर महागठबंधन के विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। हालांकि, इस बैठक में विधायकों को एकजुट रखने के लिए ‘मटन पार्टी’ का आयोजन किया गया, ताकि अनौपचारिक माहौल में विधायकों की नाराजगी दूर की जा सके। तेजस्वी ने स्पष्ट किया है कि एक-एक वोट कीमती है और मतदान के दिन किसी भी प्रकार की तकनीकी चूक या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, राजद विधायक भाई वीरेंद्र का दावा है कि उनके पास 41 विधायकों का समर्थन सुनिश्चित है और राजद प्रत्याशी की जीत तय है।

AIMIM और BSP का ‘वेट एंड वॉच’ रुख;
इस चुनाव में AIMIM के 5 विधायक और BSP के 1 विधायक ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गए हैं। तेजस्वी ने इन्हें भी बैठक में आमंत्रित किया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने साफ कहा कि उन्हें बैठक का कोई औपचारिक न्योता नहीं मिला। उन्होंने इसे तेजस्वी की ‘पारिवारिक बैठक’ करार दिया। वहीं, पार्टी चाहती थी कि राजद उनके उम्मीदवार का समर्थन करे क्योंकि उच्च सदन (राज्यसभा) में उनका कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। बात न बनने के कारण अब AIMIM समर्थन देने से पहले विचार करने की मुद्रा में है।

क्रॉस वोटिंग का डर और ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की सुगबुगाहट;
महागठबंधन के भीतर सबसे बड़ी चिंता क्रॉस वोटिंग को लेकर है। चर्चा है कि कांग्रेस के कुछ विधायक एनडीए के संपर्क में हो सकते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस अपने विधायकों की किलेबंदी में जुटी है। एनडीए की नजर विपक्षी खेमे के असंतुष्ट विधायकों पर है। अगर विपक्षी खेमे से कुछ वोट टूटते हैं, तो राजद के उम्मीदवार की मुश्किलें बढ़नी तय हैं।

आगे क्या?
बिहार की राजनीति में यह चुनाव केवल राज्यसभा जाने का रास्ता नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले शक्ति प्रदर्शन (Show of Strength) का एक बड़ा जरिया है। यदि तेजस्वी यादव अपने कुनबे और अन्य छोटे दलों को साधने में सफल रहते हैं, तो वे अपनी ताकत का लोहा मनवा लेंगे। दूसरी ओर, यदि एनडीए 5वीं सीट पर सेंधमारी करता है, तो यह विपक्षी एकता के लिए एक बड़ा झटका होगा।

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