बिहार चावल आपूर्ति में बड़े घोटाले की आहट: घटिया FRK को लेकर राईस मिल एसोसिएशन ने खोला मोर्चा…

Ritu Raj

बिहार स्टेट राईस मिल एसोसिएशन ने राज्य में फोर्टिफाइड राईस कर्नल (FRK) की आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव रंजन कुमार उर्फ राजू गुप्ता ने खाद्य एवं उपभोक्ता विभाग के सचिव को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि हरियाणा की कंपनी ‘दीपम इंडस्ट्रीज’ द्वारा मिलों में जबरन सड़ा-गला और घटिया स्तर का FRK भेजा जा रहा है।

प्रमुख आरोप और चिंताएं;
केंद्र सरकार के मानकों को ताक पर रखकर निम्न स्तर का FRK सप्लाई किया जा रहा है। राजू गुप्ता के अनुसार, यदि मिलों में उपलब्ध स्टॉक की निष्पक्ष जांच हो, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। घटिया चावल की आपूर्ति से गरीब उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह प्रधानमंत्री के ‘पोषणयुक्त भारत’ संकल्प के विरुद्ध है। शिकायत में कहा गया है कि कंपनी धन लाभ के लिए मिलरों से अवैध वसूली कर रही है। विरोध करने पर अधिकारियों द्वारा जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। एसोसिएशन ने कंपनी के ट्रांसपोर्टेशन रूट पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि हरियाणा से बिहार तक के टोल प्लाजा के रिकॉर्ड की जांच हो। संदेह है कि माल हरियाणा से नहीं आ रहा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही घटिया माल तैयार कर सप्लाई किया जा रहा है। “पूर्व में भी ऐसी ही लापरवाही के कारण 1500 करोड़ का चावल घोटाला हो चुका है। बार-बार लैब टेस्ट फेल होना यह साबित करता है कि निर्माता कंपनी जानबूझकर नियमों की धज्जियां उड़ा रही है।”- राजू गुप्ता, अध्यक्ष (बिहार स्टेट राईस मिल एसोसिएशन)

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एसोसिएशन की मुख्य मांगें;
स्वतंत्र जांच: किसी स्वतंत्र एजेंसी से FRK और CMR (Custom Milled Rice) के नमूनों की जांच कराई जाए।
टेंडर रद्दीकरण: मानकों पर खरा न उतरने वाली कंपनियों का टेंडर तत्काल प्रभाव से रद्द हो।
कठोर कार्रवाई: जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली कंपनियों और उनका साथ देने वाले अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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