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बिहार की राजनीति में शनिवार की सुबह एक अप्रत्याशित हलचल लेकर आई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक राजभवन पहुंचे और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राज्य के सियासी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म हो गया है। सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर दिल्ली की राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं?
नामांकन के बाद पहली राजभवन यात्रा
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। राज्यसभा के लिए पर्चा भरने के बाद यह पहला मौका है जब वे राजभवन पहुंचे हैं। राजनीतिक नियमों के अनुसार, यदि वे राज्यसभा सदस्य के रूप में केंद्र की राजनीति में सक्रिय होते हैं, तो उन्हें संवैधानिक रूप से मुख्यमंत्री का पद त्यागना होगा। यही कारण है कि उनके राजभवन जाने को सीधे तौर पर उनके संभावित इस्तीफे से जोड़कर देखा जा रहा है।
शिष्टाचार भेंट या विदाई की तैयारी?
आधिकारिक तौर पर राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मुलाकात को एक ‘शिष्टाचार भेंट’ करार दिया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह मुलाकात वर्तमान राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के विदाई समारोह से भी जुड़ी हो सकती है। केंद्र सरकार ने हाल ही में बिहार के नए राज्यपाल के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन के नाम की घोषणा की है। नए राज्यपाल के आने से पहले मौजूदा राज्यपाल के सम्मान में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सत्ता परिवर्तन और जेडीयू का भविष्य
यदि नीतीश कुमार वास्तव में इस्तीफा देते हैं, तो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति पैदा हो जाएगी। ऐसे में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर अगले उत्तराधिकारी को लेकर मंथन तेज हो सकता है। पटना की सड़कों पर जिस तरह से निशांत कुमार के पोस्टर लगे हैं और जिस तरह नीतीश कुमार राजभवन की दहलीज पर पहुंचे हैं, वह राज्य में एक बड़े ‘पावर शिफ्ट’ की ओर इशारा कर रहा है।
फिलहाल, राजभवन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन 12 और 13 मार्च को होने वाले राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह से पहले मुख्यमंत्री की यह सक्रियता बिहार की राजनीति में किसी बड़े धमाके का संकेत दे रही है।