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पटना। बिहार में एक बार फिर घोटालों की गूंज तेज हो गई है। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बिहार सरकार की नल जल योजना और विभिन्न टेंडरों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में जारी सभी टेंडरों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए क्योंकि इसमें बड़े से लेकर छोटे अधिकारियों तक, सभी ने 10% से अधिक कमीशन खाकर ठेके हड़प लिए हैं। पप्पू यादव ने सीधे तौर पर प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे मुख्य सचिव से मुलाकात करने जा रहे हैं और इस पूरे घोटाले की जांच के लिए औपचारिक पत्र लिखेंगे। उन्होंने दावा किया कि अगर 20% भी नल जल योजना सफल हो जाती है, तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। यह बयान सरकार के कामकाज पर गंभीर अविश्वास को दर्शाता है।
लोक सेवा आयोग पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में जारी अनियमितताओं को लेकर भी पप्पू यादव सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद भी सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है, इसलिए वे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे।

वक्फ बोर्ड विवाद: सरकार पर बढ़ता दबाव
वक्फ बोर्ड को लेकर भी पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीधे तौर पर फैसला लेने की चुनौती दी। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का उदाहरण देते हुए कहा कि नायडू ने वक्फ संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण नहीं होने देने की घोषणा की है। उन्होंने नीतीश कुमार से भी इसी तरह का रुख अपनाने की मांग की।
सरकार की पुरानी नाकामियां भी सवालों के घेरे में
यह पहली बार नहीं है जब बिहार सरकार की योजनाएं संदेह के घेरे में आई हैं। इससे पहले भी बिहार में बालू घोटाला, शौचालय निर्माण घोटाला और सृजन घोटाले जैसे बड़े भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो चुके हैं। बावजूद इसके, सरकार के स्तर पर कोई कड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिली। अब सवाल यह उठता है कि क्या बिहार सरकार इन गंभीर आरोपों पर जांच करवाएगी या हमेशा की तरह इन आरोपों को नजरअंदाज कर दिया जाएगा? क्या टेंडर घोटाले में शामिल भ्रष्टाचारियों पर गाज गिरेगी या यह भी एक राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाएगा? बिहार की जनता इन सवालों का जवाब चाहती है।