स्मार्टफोन की दुनिया पिछले एक दशक में जितनी तेजी से बदली है, उतना ही बदला है हमारे हाथों में पकड़े जाने वाले फोन का आकार, डिजाइन और तकनीक। कभी पीछे का प्लास्टिक कवर हटाकर बैटरी निकालने वाले फोन का दौर था—एक बैटरी निकालो, दूसरी लगाओ और तुरंत काम शुरू। लेकिन आज के स्मार्टफोन पूरी तरह सील्ड बॉडी और नॉन-रिमूवेबल बैटरी के साथ आते हैं। शुरुआत में इस बदलाव ने यूज़र्स को चौंकाया, कई लोग नाराज़ भी हुए, लेकिन समय के साथ यह इंडस्ट्री का नया मानक बन गया। बड़ा सवाल यह है कि यह बदलाव कंपनियों की मजबूरी थी, मार्केट की रणनीति या फिर कंज्यूमर की ही मांग? और सबसे अहम कि क्या इससे हमें फायदा हुआ या नुकसान? आइए समझते हैं कि आखिर रिमूवेबल बैटरी का युग क्यों समाप्त हुआ और क्यों बन गए हमारी नई जरूरत।
स्मार्टफोन की बैटरी दरअसल पूरे फोन का सबसे नाज़ुक और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसके भीतर मौजूद पतली इलेक्ट्रोलाइट लेयर ही ऊर्जा को स्टोर करती है, और यही लेयर अगर जरा-सी भी क्षतिग्रस्त हो जाए। साथ ही फट जाए या इलेक्ट्रोड आपस में छू जाएं तो बैटरी गर्म होकर फूल सकती है, लीक कर सकती है या गंभीर स्थिति में आग भी पकड़ सकती है। पुराने दौर में रिमूवेबल बैटरियों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें एक मोटे प्लास्टिक केस में बंद किया जाता था, जिससे फोन भारी और मोटे बन जाते थे। लेकिन जब मार्केट ने पतले, हल्के और प्रीमियम लुक वाले फोन की मांग की, तब कंपनियों ने रास्ता निकाला कि बैटरी को पूरी तरह फोन के अंदर सील कर दिया जाए, ताकि उसकी सुरक्षा खुद फोन की बॉडी संभाल ले। वहीं, पहले के हैंडसेट आम बैटरियों पर चलते थे, इसलिए यूज़र स्पेयर बैटरी साथ रखते थे। लेकिन आज की लिथियम-आयन और लिथियम-पॉलीमर बैटरियां ज़्यादा पावरफुल हैं, ज्यादा देर चलती हैं और फास्ट चार्जिंग से मिनटों में भर जाती हैं। नतीजा यह हुआ कि दिन में बैटरी बदलने की जरूरत ही खत्म हो गई। हालांकि, उधर आधुनिक फोन महंगे हुए, डिजाइन प्रीमियम हुआ, दोनों तरफ ग्लास आने लगा और पानी-धूल से बचाव के लिए IP रेटिंग जरूरी हो गई। अगर बैटरी हटाने योग्य होती, तो बैक कवर भी हटाया जा सकता था, जिससे पानी, धूल और झटकों से सुरक्षा कम हो जाती। सील्ड बॉडी ने फोन की मजबूती और टिकाऊपन तो खूब बढ़ाया, लेकिन इसी के साथ रिमूवेबल बैटरी हमेशा के लिए इतिहास बन गई।
आज लगभग हर स्मार्टफोन में Find My Device जैसी सुरक्षा तकनीक होती है, जो फोन बंद होने के बाद भी उसकी लोकेशन पकड़ लेती है। लेकिन अगर बैटरी निकालना उतना ही आसान होता जितना पहले था, तो चोर महज़ दो सेकंड में बैटरी निकालकर फोन को पूरी तरह ऑफ कर देता और ट्रैकिंग का कोई मतलब नहीं रह जाता। सील्ड बैटरी ने इस कमजोरी को खत्म कर दिया। बैटरी निकालना मुश्किल होने से फोन को ट्रैक करना आसान हुआ, सुरक्षा बढ़ी और चोरी के मामलों में रिकवरी की संभावना भी। यही वजह है कि रिमूवेबल बैटरी का दौर खत्म होते-होते नई तकनीक का सुरक्षा कवच और मजबूत हो गया।