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बिहार कैडर के 1991 बैच के वरिष्ठ और बेहद काबिल आईपीएस अधिकारी प्रवीण वशिष्ठ ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। बिहार सरकार के गृह विभाग ने उन्हें नियमों में विशेष छूट देते हुए उनके आवेदन को स्वीकार कर लिया है। प्रवीण वशिष्ठ, जो वर्तमान में महानिदेशक (DG) रैंक के अधिकारी हैं, अब खाकी वर्दी छोड़कर एक नई और महत्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका में नजर आएंगे।
क्यों समय से पहले लिया रिटायरमेंट?
प्रवीण वशिष्ठ की सेवानिवृत्ति की खबर ने प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। दरअसल, उनकी नियुक्ति केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में सतर्कता आयुक्त (Vigilance Commissioner) के गरिमामयी पद पर हुई है। चूंकि यह एक संवैधानिक पद है, इसलिए नियमों के अनुसार उन्हें सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होना अनिवार्य था। इसी वजह से उन्होंने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को VRS के लिए आवेदन दिया था।
3 महीने के नोटिस पीरियड में मिली छूट
नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने से कम से कम 3 महीने पहले नोटिस देना होता है। हालांकि, प्रवीण वशिष्ठ के मामले में उनकी नई नियुक्ति की महत्ता को देखते हुए बिहार सरकार ने उदारता दिखाई। गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार, 3 महीने के नोटिस की अनिवार्य शर्त में ढील देते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त होने की अनुमति दे दी गई है।
शानदार रहा है करियर ग्राफ
1991 बैच के आईपीएस प्रवीण वशिष्ठ लंबे समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे और नई दिल्ली में गृह मंत्रालय (MHA) में विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वह अपनी ईमानदारी और कार्यकुशलता के लिए जाने जाते रहे हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, वह मूल रूप से 31 मई 2026 को पुलिस सेवा से रिटायर होने वाले थे, लेकिन सतर्कता आयुक्त बनाए जाने के बाद उन्होंने करीब 5 महीने पहले ही रिटायरमेंट ले लिया।
सतर्कता आयुक्त के रूप में नई चुनौती
अब सतर्कता आयुक्त के रूप में प्रवीण वशिष्ठ केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों और विभिन्न विभागों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बिहार सरकार के इस फैसले के बाद राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें उनके नए कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दी हैं।