बिहार के IAS अंशुल कुमार का राष्ट्रीय स्तर पर जलवा: पूर्णिया को मिला ‘बेस्ट इलेक्शन डिस्ट्रिक्ट’ अवार्ड, राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के प्रशासनिक गलियारे से एक बड़ी और गौरवशाली खबर सामने आई है। पूर्णिया के जिला अधिकारी (DM) अंशुल कुमार ने अपनी कार्यकुशलता और चुनावी प्रबंधन से जिले का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पूर्णिया जिले में हुए ऐतिहासिक मतदान और उत्कृष्ट चुनावी प्रबंधन के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने अंशुल कुमार को ‘बेस्ट इलेक्शन डिस्ट्रिक्ट’ (Best Election District) अवार्ड के लिए चुना है।

राष्ट्रपति के हाथों मिलेगा सम्मान
आगामी 25 जनवरी को ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में दिया जाएगा। अंशुल कुमार को यह पुरस्कार ‘इलेक्शन मैनेजमेंट एंड लॉजिस्टिक्स’ श्रेणी में उनके असाधारण योगदान और प्रशासनिक नवाचारों के लिए मिल रहा है।

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वोटिंग प्रतिशत में पूर्णिया ने गाड़े झंडे
पूर्णिया जिले ने इस चुनाव में लोकतांत्रिक भागीदारी की एक नई मिसाल पेश की है। जिले के आंकड़ों पर नजर डालें तो सफलता की कहानी खुद-ब-खुद साफ हो जाती है:

76.61% मतदान: पूर्णिया जिले ने कुल 76.61 प्रतिशत मतदान दर्ज किया, जिसके साथ ही यह बिहार के सभी 38 जिलों में तीसरे स्थान पर रहा।

कस्बा विधानसभा का रिकॉर्ड: जिले के कस्बा विधानसभा क्षेत्र ने तो पूरे बिहार में कीर्तिमान स्थापित कर दिया। यहाँ 81.97 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक (Highest) रही।

कैसे मिली यह बड़ी कामयाबी?
जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, यह उपलब्धि डीएम अंशुल कुमार के नेतृत्व में किए गए सूक्ष्म बूथ मैनेजमेंट और व्यापक मतदाता जागरूकता अभियानों का नतीजा है। प्रशासन ने न केवल सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, बल्कि मतदाताओं के लिए ‘लॉजिस्टिक्स’ और सुविधाओं को इस तरह व्यवस्थित किया कि लोगों में भरोसे का माहौल बना। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में चलाए गए जागरूकता अभियानों ने युवाओं और महिलाओं को घर से निकलकर वोट डालने के लिए प्रेरित किया।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्णिया ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासनिक नीयत साफ हो और रणनीति सटीक हो, तो विपरीत परिस्थितियों में भी मतदान प्रतिशत को बढ़ाया जा सकता है। अब पूर्णिया के इस मॉडल की चर्चा पूरे देश में हो रही है और इसे भविष्य के चुनावों के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ के रूप में देखा जा रहा है।

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