सिटी पोस्ट लाइव : केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर लगातार सवाल उठा रहे थे. 7 जुलाई 2025 को चिराग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कल नालंदा के बिहारशरीफ में अपराधियों द्वारा 16 वर्षीय हिमांशु पासवान एवं 20 वर्षीय अनु कुमार की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई. ये घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है. यह जघन्य घटना न केवल मानवता को झकझोरती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है.26 जुलाई 2025 को फिर चिराग ने बिहार में बढ़ते अपराध और ढीली कानून-व्यवस्था पर कहा था कि मुझे दुख है कि मैं ऐसी सरकार का समर्थन कर रहा हूं. उन्होंने प्रशासन और पुलिस पर आरोप लगाया कि वे अपराधियों के आगे नतमस्तक हैं, अपराधियों की मनमानी हो रही है. गया में एंबुलेंस में युवती से दुष्कर्म जैसी घटनाओं के बाद चिराग पासवान ने ये बयान दिया था.
अब चिराग पासवान नीतीश कुमार की तारीफ करने लगे हैं.4 अगस्त 2025 को केंद्रीय मंत्री चिराग ने कहा कि शुरुआत में आलोचना की लेकिन अब उन्हें “100 % फिट” नेता दिखते हैं और विश्वास जताया कि एनडीए 225 से अधिक सीटें जीत सकता है.चिराग पासवान ने कहा कि नीतीश कुमार अगले पांच साल तक बिहार चलाने के लिए पूरी तरह से स्वस्थ और ठीक हैं. उनके नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा जाएगा और एनडीए जीत भी दर्ज करेगा. उन्होंने कहा कि बिहार अभी जिस दौर से गुजर रहा है, उसे अनुभवी नेतृत्व की जरूरत है. नीतीश कुमार ही हैं, जिन्होंने राज्य को ‘जंगल राज’ से निकालकर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है.
सवाल उठ रहा है कि आखिर अचानक चिराग के सुर क्यों बदल गये? इसे लेकर बीजेपी ने उन्हें नसीहत है. सूत्रों की माने तो पार्टी ने कहा है कि एनडीए के घटक दलों के बीच आपसी हमलों से गठबंधन की एकजुटता को नुकसान पहुंचता है. इसलिए मुख्यमंत्री पर किसी भी तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए.बीते कुछ दिनों में चिराग पासवान ने सार्वजनिक मंचों और मीडिया इंटरव्यू में बिहार सरकार की नीतियों, कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे. इन बयानों में नीतीश कुमार को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया गया था.बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के बयान विपक्ष को राजनीतिक हथियार दे सकते हैं और एनडीए के भीतर अविश्वास का माहौल बना सकते हैं.बीजेपी की यह नसीहत साफ संकेत देती है कि पार्टी गठबंधन के भीतर चुनावी वर्ष में फोकस एकजुटता बनाए रखने और साझा एजेंडे पर काम करने पर है ताकि विपक्ष के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा पेश किया जा सके।
बीजेपी नेतृत्व ने चिराग को यह भी याद दिलाया है कि 2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता है.ऐसे में घटक दलों के बीच चिराग पासवान के तेवर सेकरना जरूरी है ताकि विपक्षी महागठबंधन को किसी तरह का मौका न मिले.यह पहली बार नहीं है जब चिराग पासवान के तेवर से एनडीए के भीतर हलचल मची है. 2020 विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जेडीयू के खिलाफ प्रत्याशी उतारकर राजनीतिक समीकरण हिला दिए थे.हालांकि तब वह औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा नहीं थे. इस बार स्थिति अलग है क्योंकि एलजेपी रामविलास सीधे तौर पर एनडीए में शामिल है और केंद्र सरकार में भी हिस्सेदार हैं.
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि बीजेपी ने 2020 के चुनाव में भी चिराग का पॉलिटिकल यूज किया. 2025 में भी यही कर रही. चिराग से नीतीश सरकार के खिलाफ बयानबाजी कराई जाती है फिर कभी निर्देश दिया जाता है. नीतीश कुमार और बीजेपी एक साथ नूराकुश्ती खेलते रहते हैं. राजनीति साफ दिख रही है. बीजेपी नीतीश कुमार के चेहरे को चुनाव तक बनाकर रखना चाहती है. फिर चुनाव के बाद बदलना चाहती है. इस नूराकुश्ती के खेल में चिराग पासवान बीजेपी के इंस्ट्रूमेंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. बीजेपी ने उनको क्या निर्देश दिया है, नहीं दिया है ये नहीं पता, लेकिन वो अपने ही अलायंस के लोगों को कमजोर कर रहे.