पीएम मोदी के बिहार दौरे से पहले BJP का बड़ा एक्शन, एक और पूर्व जिलाध्यक्ष 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में टिकट बंटवारे के बाद भाजपा के भीतर उठे बगावत के सुरों पर पार्टी ने अब सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार में दूसरे चरण के दौरे से ठीक पहले, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दल-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप में समस्तीपुर के एक पूर्व जिलाध्यक्ष को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई उन नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो एनडीए के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ चुनावी मैदान में डटे हुए हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा होते ही, भाजपा के कई वरिष्ठ कार्यकर्ता और नेता असंतुष्ट हो गए थे। कई ने तो पार्टी या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय या अन्य दलों के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया था।

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इस बगावत को शांत करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पटना में तीन दिनों तक डेरा डाला था। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात कर उन्हें मनाने की कोशिश की। इस प्रयास का सकारात्मक परिणाम भी दिखा, जब कई बागी नेता वापस पार्टी के पाले में लौटे और उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे शीर्ष नेतृत्व के प्रति उनका भरोसा एक बार फिर जगजाहिर हुआ।

हालांकि, कुछ नेता अभी भी चुनावी मैदान में डटे हुए हैं और एनडीए के उम्मीदवारों के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। इन नेताओं पर अब पार्टी ने सख्त रुख अपना लिया है। पहले छह नेताओं पर कार्रवाई के बाद, बुधवार को भाजपा ने एक और बड़ा एक्शन लिया।

समस्तीपुर के उजियारपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पूर्व जिला अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी ने छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। भाजपा के प्रदेश मुख्यालय से जारी एक पत्र में कहा गया है कि उपेंद्र कुशवाहा विधानसभा चुनाव में एनडीए के अधिकृत प्रत्याशी के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से दल-विरोधी कार्य है।

पार्टी ने कहा कि उनके इस कृत्य से दल की छवि धूमिल हुई है और यह पार्टी अनुशासन का उल्लंघन है। प्रदेश अध्यक्ष के आदेश पर उन्हें तत्काल प्रभाव से 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। गौरतलब है कि उजियारपुर सीट पर उपेंद्र कुशवाहा भाजपा से टिकट पाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन यह सीट गठबंधन के तहत राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के खाते में चली गई। इसके बाद, उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई है।

यह सख्ती ऐसे समय में आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। इससे पहले, पीएम मोदी ने अपनी पहली जनसभा समस्तीपुर से ही शुरू की थी।

इससे पहले भी भाजपा एक निवर्तमान विधायक सहित छह नेताओं पर इसी तरह के आरोपों में कार्रवाई कर चुकी है। जिन नेताओं को तब पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था, उनमें कहलगांव से निवर्तमान विधायक पवन यादव भी शामिल थे, जिन्होंने बागी तेवर अपनाते हुए चुनाव लड़ने का फैसला किया था। पार्टी का यह लगातार एक्शन यह दर्शाता है कि वह आगामी चुनाव में किसी भी कीमत पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेगी।

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