बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत शनिवार को वैशाली पहुंचे, जहाँ करोड़ों की योजनाओं की सौगात के बीच उनकी एक जुबानी चूक ने सबको हैरान कर दिया। जिस ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय’ का उद्घाटन खुद मुख्यमंत्री ने कुछ ही समय पहले किया था, उसे मंच से संबोधन के दौरान उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि दो बार “वृद्ध सम्यक दर्शन” कहकर पुकारा।
अधिकारियों की चुप्पी और ‘सियासी फुसफुसाहट’;
हैरानी की बात यह रही कि जब मुख्यमंत्री बार-बार इस विश्वप्रसिद्ध स्मारक का नाम गलत ले रहे थे, तब मंच पर मौजूद दोनों उपमुख्यमंत्री, कई कैबिनेट मंत्री और जिले के आला अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। किसी ने भी मुख्यमंत्री को टोकने या गलती सुधारने का साहस नहीं दिखाया। गौरतलब है कि वैशाली का यह संग्रहालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखता है और विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। ऐसे में सूबे के मुखिया द्वारा इसके नाम में की गई यह त्रुटि अब चर्चा का विषय बन गई है।
करोड़ों की सौगात, मगर चर्चा ‘चूक’ की;
मुख्यमंत्री जंदाहा के बटेश्वर नाथ मंदिर परिसर में एक विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने वैशाली जिले के लिए 15,194.31 करोड़ रुपये की लागत वाली 128 विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। लेकिन विकास के इन आंकड़ों पर मुख्यमंत्री की ‘फिसलती जुबान’ भारी पड़ती दिखी।
क्या स्क्रिप्ट में थी चूक?
हाल के दिनों में नीतीश कुमार के सार्वजनिक व्यवहार और उनके बयानों को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। वैशाली की इस सभा के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह महज एक मानवीय भूल (Slip of Tongue) थी या फिर मुख्यमंत्री की स्क्रिप्ट तैयार करने वाले अधिकारियों की लापरवाही? राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इन्हीं स्थितियों के कारण अब सार्वजनिक मंचों पर मुख्यमंत्री के दोनों ओर उपमुख्यमंत्रियों की मौजूदगी अनिवार्य हो गई है।
विपक्ष को मिला नया मुद्दा;
समृद्धि यात्रा के जरिए नीतीश कुमार जहां अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने निकले हैं, वहीं ‘बुद्ध’ को ‘वृद्ध’ कहने वाली यह चूक विपक्ष के तरकश में एक नया तीर दे गई है। चुनाव से ठीक पहले इस तरह की चूक नीतीश सरकार की ब्रांडिंग के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है।