सिटी पोस्ट लाइव
रक्षा क्षेत्र में भारत एक और बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन को मजबूती देते हुए, अब फ्रांस की सुप्रसिद्ध ‘हैमर’ (HAMMER) मिसाइल का निर्माण भारत की धरती पर होने जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर मुहर लगने की पूरी संभावना है।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और फ्रांस की दिग्गज रक्षा कंपनी सफ्रान (Safran) ने इस प्रोजेक्ट के लिए हाथ मिलाया है। यह साझेदारी न केवल भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी स्थापित करेगी।
क्यों खास है ‘हैमर’ मिसाइल?
हैमर (Highly Agile Modular Munition Extended Range) कोई साधारण मिसाइल नहीं, बल्कि एक स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन है। इसकी तकनीकी विशेषताएं इसे दुनिया के सबसे सटीक हथियारों की श्रेणी में खड़ा करती हैं:
अचूक मारक क्षमता: इस मिसाइल की रेंज 60 से 70 किलोमीटर तक है। इसका मतलब है कि भारतीय पायलट दुश्मन की सीमा में घुसे बिना, सुरक्षित दूरी से ही उनके ठिकानों को मटियामेट कर सकते हैं।
दुर्गम क्षेत्रों के लिए वरदान: इसे विशेष रूप से पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है। लद्दाख या अरुणाचल जैसे क्षेत्रों में, जहां दुश्मन ऊंचाइयों पर बंकर बनाकर छिपे होते हैं, वहां हैमर मिसाइल उनके लिए ‘काल’ साबित होती है। यह कंक्रीट के बेहद मजबूत बंकरों को भी भेदने की शक्ति रखती है।
‘दागो और भूल जाओ’ तकनीक: हैमर ‘Fire and Forget’ के सिद्धांत पर काम करती है। एक बार टारगेट लॉक करने के बाद मिसाइल खुद अपना रास्ता तय करती है। इसकी उन्नत नेविगेशन प्रणाली इसे लगभग 100% सटीक बनाती है, जिससे मानवीय चूक की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
मल्टी-टारगेटिंग क्षमता: एक अकेला राफेल फाइटर जेट अपने साथ 6 हैमर मिसाइलें ले जा सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये छह मिसाइलें एक ही समय में छह अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकती हैं, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलता।
भारत के लिए सामरिक महत्व
भारत पहले से ही फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया में है। ऐसे में हैमर मिसाइल का भारत में निर्माण होना रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे मिसाइलों की आपूर्ति तेज होगी, लागत में कमी आएगी और मरम्मत व रखरखाव के लिए हमें दूसरे देशों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा।