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आज के डिजिटल युग में कॉल रिकॉर्डिंग एक आम बात हो गई है। मोबाइल ऐप्स और स्मार्टफोन की सुविधाओं ने इसे और आसान बना दिया है। कई बार लोग कॉल्स को सबूत के तौर पर रिकॉर्ड कर लेते हैं। लेकिन जब इसी कॉल को डराने या धमकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है तो इसे अपराध की श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी कॉल रिकॉर्ड करना या किसी की कॉल को रिकॉर्ड करना कानूनन कितना सही है?
दरअसल, एक्सपर्ट के मुताबिक, इसको लेकर भारत में कोई खास कानून नहीं है, लेकिन 3 धाराएं मुख्य रूप से जुड़े है।
भारतीय दूरसंचार अधिनियम, 2023 कहता है कि सरकार इसका इस्तेमाल सार्वजनिक सुरक्षा या आपात स्थिति में कॉल इंटरसेप्ट करने के लिए कर सकती है। आईटी अधिनियम, 2000 के धारा 66 ई के तहत किसी का बिना इजाजत निजी जानकारी लेना या फोटो शेयर करना अपराध होता है। इसी के तहत धारा 72 के अनुसार किसी का किसी का निजी जानकारी लेना भी अपराध है। और बीएनएस 2023 में धारा 318(2) के अनुसार धोका देकर कॉल रिकॉर्डिंग करना और उससे नुकसान पहुंचाना वो भी एक तरह का अपराध है। सबसे अहम बात है कि अगर मोबाइल में पहले से कॉल रिकॉर्डिंग ऑन है तो उसे अवैध माना जाएगा, जब तक उसका इस्तेमाल गलत मकसद से नहीं किया जाता है। वहीं, किसी के बात को चोरी-छिपे भी रिकॉर्ड करना गैरकानूनी है।
हालांकि, कॉल रिकॉर्ड करते समय हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बातचीत शुरू होने से पहले सामने वाले का कंसेंट ले,फिर अनुमति के बाद ही कॉल रिकॉर्ड करें। ध्यान रखें कि रिकॉर्डिंग केवल कानूनी सबूत, सेवा सुधार या जरूरी डॉक्यूमेंटेशन के लिए ही करें। इसके साथ ही रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या पब्लिक पोर्टल पर साझा करने से बचें। उसके बाद एडिट कर रिकॉर्डिंग को ऑल्टर करने की कोशिश न करें। अगर बैकग्राउंड में क्लिकिंग या हल्की बीप जैसी आवाजें आ रही है या आवाज में लैग महसूस हो रही है या बातचीत के बीच किसी तीसरे शख्स की आवाज सुनाई दे रही है तो समझ जाएं कि कोई आपकी कॉल रिकॉर्डिंग कर रहा है। और आपको बता दें कि वॉयस कॉल्स की तरह वीडियो कॉल पर भी ये नियम लागू होती है। वहीं, आपको कोई कॉल पर डरा, धमका या ब्लैकमेल कर रहा है तो आप उसका रिकॉर्ड कर सकते हैं,जो कानूनन रूप से सही है।