इमारत-ए-शरिया में ‘घमासान’, RJD-JDU समर्थकों के बीच टकराव तेज.

City Post Live

 

सिटी पोस्ट लाइव :चुनावी साल में सियासत का रंग धार्मिक संगठनों के ऊपर भी देखा जा रहा है.जेडीयू और आरजेडी के समर्थन को लेकर  इमारत-ए-शरिया में घमाशान शुरू हो गया है. इमारत-ए-शरिया में नेतृत्व को लेकर जेडीयू और आरजेडी समर्थकों के बीच तलवारें खिंच गई हैं.फुलवारी शरीफ स्थित मुसलमानों के लिए बने बिहार झारखंड और ओडिशा की प्रमुख संस्था इमारत-ए-शरिया में  ट्रस्ट की कुर्सी को लेकर जारी घमासान में दो गुट आमने-सामने हैं. एक पक्ष ने नाजिम पद से मौलाना शिबली कासमी को हटाकर मौलाना सईदुर्रहमान कासमी को नया नाजिम बना दिया, तो वहीं दूसरे पक्ष ने मौलाना फजल बली रहमानी को अमरीकी नागरिक बताते हुए उनके स्थान पर मौलाना अनिसुर रहमान कासमी को नया अमीर-ए-शरीयत घोषित कर दिया. इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुस्लिम समाज में हलचल मच गई है.

राजनीतिक दखलअंदाजी के कारण इमारत-ए-शरिया के अंदरूनी मामलों में गहरा संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे संस्था की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. मौलाना सईदुर्रहमान कासमी के समर्थकों का कहना है कि उनका चयन इमारतें सरिया के ट्रस्टी ने सही प्रक्रिया से हुआ है और वे इस पद के योग्य हैं. वहीं, मौलाना अनिसुर रहमान कासमी को अमीर-ए-शरीयत बनाए जाने वाले पक्ष के ट्रस्टी और पूर्व राज्य सभा सांसद अशफाक करीम का आरोप है कि मौलाना फजल बली रहमानी भारतीय नागरिक नहीं है, वह अमरीकी नागरिक हैं. उनके पासपोर्ट में भी उनके USA की नागरिक होने का प्रमाण है, इसलिए उन्हें इंडियन पर्सनल बोर्ड ने इस जानकारी के बाद उन्हें सचिव पद से हटा दिया है.

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

नए नाजिम बनाए गए सईदुर्रहमान कासमी ने कहा है कि इसमें जेडीयू के नेता का हस्तक्षेप हो रहा है और ईद के पहले बवाल किया जा रहा है. मामला अभी शांत हो गया है और ट्रस्ट में घोटाले की बात आ रही है तो हम 25 दिन पहले नाजिम बने हैं, इससे पहले वाले से इसका हिसाब मांगा जाए. रहा सवाल अमीर ए शरीयत के विदेशी नागरिक होने की तो ऐसा ट्रस्ट में कोई जिक्र नहीं है. इन्होंने बताया कि नीतीश कुमार के इफ्तार पार्टी में नहीं जाना और वक्फ बोर्ड के विरोध से नीतीश कुमार के खफा होने की वजह से इमारत ए शरिया को तोड़ने की राजनीतिक कोशिश की जा रही है.

Share This Article