मोकामा की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह का दबदबा जगजाहिर है। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने रेलवे कॉलोनी के निवासियों को भरोसा दिया था कि अगले तीन महीनों तक उनके आशियाने सुरक्षित रहेंगे। लेकिन गुरुवार की सुबह यह आश्वासन उस वक्त धराशायी हो गया जब रेलवे का पीला पंजा (बुलडोजर) भारी पुलिस बल के साथ वहां आ धमका।

रेलवे की इस सख्त कार्रवाई के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण रहे, जिनमें दानापुर रेल मंडल के प्रबंधक (DRM) विनोद कुमार द्वारा 20 मार्च 2026 को मोकामा स्टेशन के निरीक्षण के दौरान रेलवे की जमीन पर बढ़ते अवैध कब्जों पर जताई गई सख्त नाराजगी प्रमुख रही; साथ ही अधिकारियों का मानना है कि स्टेशन के आधुनिकीकरण और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए अतिक्रमण हटाना आवश्यक था, जिसके चलते गुरुवार सुबह इंजीनियरिंग विभाग और RPF की टीम ने जेसीबी की मदद से झोपड़ियों और दुकानों को ढहा दिया, जिससे करीब 40 परिवार सीधे प्रभावित हुए।

आश्वासन और हकीकत का टकराव;
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे एक दिन पहले ही अनंत सिंह से मिले थे, जहाँ उन्हें राहत का भरोसा मिला था। हालांकि, प्रशासन ने इस सियासी आश्वासन को दरकिनार करते हुए कानून सम्मत कार्रवाई को प्राथमिकता दी। प्रशासन के इस कड़े रुख ने यह संदेश दिया है कि विकास कार्यों और सरकारी भूमि के मामले में ‘पहुंच’ और ‘आश्वासन’ से ऊपर नियम होते हैं। यह घटना स्पष्ट करती है कि मोकामा में अब ‘पावर’ के दो केंद्रों के बीच सीधा संघर्ष है। एक तरफ दशकों पुराना राजनीतिक रसूख और दूसरी तरफ सरकारी मशीनरी का प्रशासनिक डंडा। फिलहाल, प्रभावित परिवारों के लिए राहत की कोई किरण नजर नहीं आ रही है।