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बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सबसे ज्यादा चर्चा पांचवीं सीट को लेकर है, जिस पर एनडीए और महागठबंधन के बीच शह-मात का खेल जारी है। इस बीच, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपनी मां रीना पासवान के चुनाव लड़ने की तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
मां चुनाव नहीं लड़ेंगी, पर दावेदारी बरकरार!
पटना में पत्रकारों से बात करते हुए चिराग पासवान ने स्पष्ट किया, “मेरी मां सक्रिय राजनीति में नहीं आएंगी। जब पिताजी के रहते वह राज्यसभा नहीं गईं, तो अब उनके जाने का सवाल ही नहीं उठता। मेरे परिवार से भी कोई इस बार राज्यसभा नहीं जाएगा।” हालांकि, चिराग ने परिवारवाद के आरोपों से बचने के लिए अपनी मां के नाम पर विराम तो लगा दिया, लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि इस सीट पर उनकी पार्टी (LJP-R) का दावा नहीं होगा।
5वीं सीट का गणित: चिराग का पलड़ा भारी
बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो पांचवीं सीट के लिए रस्साकशी दिलचस्प है। एनडीए को इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए मात्र 3 विधायकों की कमी पड़ रही है, जबकि महागठबंधन को 6 विधायकों की दरकार है। दो सीटें भाजपा और दो सीटें जदयू के खाते में जाने के बाद एनडीए के पास 38 अतिरिक्त विधायक बचते हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा चिराग की पार्टी (19 विधायक) का है। शेष विधायकों में भाजपा के 7, हम (HAM) के 5, रालोमो (RLM) के 4 और जदयू के 3 विधायक शामिल हैं।
क्या बीजेपी लड़ेगी तीन सीटों पर?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तीसरी सीट पर अपना उम्मीदवार उतार सकती है। इसके पीछे की रणनीति यह है कि सहयोगी दलों (लोजपा-आर, हम, और रालोमो) के बीच किसी भी तरह के मतभेद को टाला जा सके। खबर है कि बीजेपी एक सवर्ण, एक पिछड़ा और एक दलित चेहरे को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है।
चिराग को ‘त्याग’ के बदले क्या मिलेगा?
प्रधानमंत्री मोदी के ‘हनुमान’ कहे जाने वाले चिराग पासवान अगर पांचवीं सीट बीजेपी के लिए छोड़ते हैं, तो उन्हें इसके बदले एक एमएलसी पद और एक अतिरिक्त मंत्री पद देकर एडजस्ट किया जा सकता है। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की प्राथमिकता फिलहाल अपने बेटे दीपक प्रकाश के लिए एमएलसी की सीट पक्की करना है ताकि उनका मंत्री पद सुरक्षित रह सके।