माथे पर कांग्रेसी टोपी लेकिन दिल है वामपंथी!

City Post Live

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में कांग्रेस पार्टी ‘नौकरी दो, पलायन रोको’ यात्रा कर रही है.इस यात्रा का नेत्रित्व कर रहे  पार्टी के नेता कन्हैया कुमार बिहार में नई सड़कों के निर्माण और औद्योगीकरण को बड़ी साजिश बता रहे हैं.कन्हैया कुमार  के अनुसार दुनिया भर के पूंजीपतियों और कारोबारी की नजर बिहार के पानी पर है. बिहार में बड़ी सड़क केंद्र सरकार एक साजिश के तहत बनवा रही है.वो बिहार के लोगों को समझा रहे हैं- बिहार में जल संसाधन है और भविष्य में पानी पेट्रोल से भी महंगा होने वाला है. सभी उद्योगपतियों की नजर बिहार के जल संसाधन पर है.  इन्हीं सड़कों से बिहार के जल संसाधन पर औद्योगिक जगत कब्जा कर लेगा और बिहार के संसाधनों को लूट लेगा.


कन्हैया कुमार के इस बयान को लेकर बिहार में राजनीति गर्मा गई है. कन्हैया कुमार की सोच पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं. सवाल पूछा जा रहा है कि- आखिर कन्हैया कुमार बिहार में नई सड़कों और औद्योगीकरण का विरोध क्यों कर रहे हैं?  बिहार के  औद्योगिकरण में  कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार को साजिश क्यों नजर आ रही है.दरअसल, कन्हैया कुमार की वामपंथी विचारधारा की पृष्ठभूमि रही है और अपने राजनीतिक कद को इसी सोच के तहत संवारते हुए आगे बढ़े हैं. कन्हैया कुमार यह भूल गए हैं कि वह अब कांग्रेस पार्टी में हैं, जो लगातार औद्योगिकीकरण पर बल देती रही है. बिहार में उद्योग की खस्ताहाल को लेकर सवाल उठाती रही है. अब जब वह कांग्रेस में हैं तब भी उनकी सोच कैसे हो सकती है. ऐसा माना जा रहा है कि कन्हैया कुमार वामपंथी विचारधारा से अपने आप को अलग नहीं कर पा रहे हैं, जो औद्योगिकरण और पूंजी निवेश के विरोधी कहे जाते हैं. उनकी इस नई फिलॉसफी से क्या बिहार का फायदा होने वाला है? या फिर उनके सवालों से बिहार में निवेश, उद्योग और यहां के विकास में बाधा आने वाली है?

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सवाल उठता है कि कांग्रेस  एक तरफ  नौकरी और पलायन को को लेकर  यात्रा कर रही है दूसरी तरफ कन्हैया कुमार  विकास को ही साजिश बता रहे हैं.कन्हैया  के सवालों के आधार पर बिहार की सड़कों का निर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिकरण ही राजनीति के निशाने पर आ जाएगा तो निवेशकर्ताओं में कहीं भ्रम और संशय की स्थिति न फैल जाए और बिहार का विकास की रफ्तार कहीं फिर पटरी से उतर ना जाए.

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