सिटी पोस्ट लाइव
बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई खतरों को भी साथ लाता है। खासकर बिजली से जुड़ी दुर्घटनाएं इस मौसम में बढ़ जाती हैं। भीगे हुए हाथों से बिजली उपकरण छूना, खुले तारों के संपर्क में आना या पानी से भरे स्थानों में बिजली चलाना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप सतर्क रहें और कुछ एहतियाती कदमों को अपनाकर खुद और अपने परिवार को सुरक्षित रखें। इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए? और ऐसी स्थिति में फर्स्ट एड का क्या महत्व है? आसपास मौजूद लोगों को कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
हालांकि, इलेक्ट्रिक शॉक हमारे शरीर को कंटक्ट करता है। जब कोई व्यक्ति बिजली के संपर्क में आता है तो करंट उसके शरीर के टिशू से होकर गुजरता है। इस तरह की चोट को इलेक्ट्रिकल इंजरी या इलेक्ट्रोक्यूशन भी कहा जाता है। वहीं इलेक्ट्रिक शॉक का असर हल्का झटका से लेकर गंभीर चोट तक हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि करंट कितना तेज था, कितनी देर तक शरीर में बहा और किस हिस्से से होकर गुजरा। कई बार शरीर पर बाहर से कोई निशान नहीं दिखता, लेकिन अंदरूनी अंगों को गहरी चोट पहुंच सकती है। हालांकि, इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर हमें ये तीन जरूरी चीजें करना बहुत जरूरी है। पहले, बिजली के सोर्स को बंद करें या लकड़ी जैसी किसी सूखी, नॉन-कंडक्टिव चीज से व्यक्ति को करंट से अलग करें। उसके बाद घायल व्यक्ति की स्थिति जांच लें। यानि अगर व्यक्ति जल गया है तो उस पर सूखा कपड़ा रखें। अगर गंभीर स्थिति में है तो एम्बुलेंस को कॉल करें और सांस रूकी हुई है तो उसे CPR दें।
गौरतलब है कि इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर इंसान को भूलकर भी ये गलतियां नहीं करनी चाहिए। घायल व्यक्ति को नंगे पैर या मेटल से न छुएं। और छुड़ाने से पहले खुद रबड़ की चप्पल पहनें। इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर डॉक्टर ECG, ब्लड टेस्ट, स्किन बर्न एसेसमेंट, CT स्कैन या MRI करवाने की सलाह देते हैं, ताकि यह पता चले कि करंट का असर दिल, नसों या शरीर के किसी अंग पर तो नहीं हुआ है।