CO की हड़ताल पर डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के तल्ख तेवर: बोले- ‘दवा हो रही है और असर भी दिखेगा’, घबराने की जरूरत नहीं

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कामकाज पर उस समय संकट के बादल छा गए, जब राज्य भर के अंचल अधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारी (RO) 2 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इस गतिरोध के बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बड़ा बयान देते हुए अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। सिन्हा ने हड़ताल की तुलना ‘बीमारी’ से करते हुए कहा कि सरकार इसके इलाज के लिए ‘दवा’ कर रही है और जल्द ही इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।

‘दवा हो रही है, समाधान निकलेगा’
पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब विजय सिन्हा से अंचल अधिकारियों की हड़ताल और जनता को हो रही परेशानी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा, “ठीक है, दवा हो रहा है और दवा का असर भी हो रहा है। घबराइए नहीं, सब कुछ ठीक होगा। जब सुधार पूरी तरह जमीन पर उतरेगा, तब यही लोग कहेंगे कि सरकार ने अच्छा काम किया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार राजस्व प्रशासन में आमूलचूल परिवर्तन और सुधार की दिशा में बढ़ रही है और किसी भी दबाव के आगे झुकेगी नहीं।

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क्या हैं हड़ताली अधिकारियों की मांगें?
बिहार राजस्व सेवा संघ के बैनर तले अधिकारी दो प्रमुख मांगों को लेकर अड़े हुए हैं:

संवर्ग नियमावली 2010 का अनुपालन: संघ चाहता है कि 2010 की नियमावली के तहत ही अधिकारियों की पदस्थापना और सेवा शर्तें तय हों।

DCLR पदों पर नियुक्ति: अधिकारियों की मांग है कि राजस्व सेवा के ही अधिकारियों को भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) और भू-अर्जन पदाधिकारी के पदों पर नियुक्त किया जाए, जिन पर वर्तमान में अन्य कैडर के अधिकारियों का वर्चस्व है।

सरकार की वैकल्पिक तैयारी
हड़ताल के कारण म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), जाति-आय प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व कार्यों के बाधित होने की आशंका को देखते हुए विभाग अलर्ट मोड पर है। राजस्व विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश जारी किए हैं कि वे वैकल्पिक व्यवस्था करें ताकि आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन कार्य बहिष्कार को लेकर उसका रुख काफी सख्त नजर आ रहा है।

कुल मिलाकर, एक तरफ जहाँ अधिकारी अपने अधिकारों की लड़ाई की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार इसे प्रशासनिक सुधारों में बाधा मान रही है। आने वाले दिनों में यह ‘दवा’ क्या रंग लाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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