सद्दाम हुसैन से लेकर भुट्टो तक…शेख हसीना से पहले किन नेताओं को मिली फांसी की सजा?

Ritu Raj

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पूरे विश्व में हलचल मच गई है। 2024 के छात्र आंदोलन पर कथित घातक कार्रवाई का आदेश देने के आरोप में हसीना सहित दो अन्य शीर्ष अधिकारियों को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले ने वैश्विक राजनीति में कई पुराने उदाहरणों की याद ताज़ा कर दी है, जब शीर्ष नेताओं को ऐसे ही गंभीर अपराधों में फांसी की सजा सुनाई गई थी। आइए जानते हैं कि शेख हसीना से पहले किन-किन विश्व नेताओं को मौत की सजा सुनाई गई थी।

ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो:
इस सूची में दूसरा नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो का आता है। 4 अप्रैल 1979 को उन्हें रावलपिंडी की जेल में फांसी दी गई। इतिहासकारों के अनुसार भुट्टो को मिला ट्रायल न तो निष्पक्ष था और न ही पारदर्शी। जनरल जिया-उल-हक के सैन्य तख्तापलट के बाद भुट्टो पर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। इस पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एक राजनीतिक प्रतिशोध और विवादित न्यायिक प्रक्रिया के रूप में देखा।

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निकोलाए चाउशेस्कु:
इस सूची में अगला नाम रोमानिया के कुख्यात तानाशाह निकोलाए चाउशेस्कु का है, जिसने करीब 25 साल तक देश पर लोहे की मुट्ठी से राज किया। 21 दिसंबर 1989 को देशव्यापी विद्रोह भड़कने पर उसे और उसकी पत्नी एलेना को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद एक सैन्य अदालत ने महज़ कुछ घंटों की कार्यवाही में दोनों को जनसंहार, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का दोषी ठहराया। फैसले के तुरंत बाद उन्हें फायरिंग स्क्वाड के हवाले कर दिया गया। चाउशेस्कु की मौत ने यूरोप में तानाशाही युग के अंत का प्रतीकात्मक अध्याय लिखा, क्योंकि 25 वर्षों में उसकी नीतियों ने रोमानिया की जनता का जीवन बेहद दयनीय बना दिया था।

मतिउर रहमान निजामी:
इस सूची में बांग्लादेश के एक और नेता मतिउर रहमान निजामी का नाम भी शामिल है। 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ गंभीर अत्याचारों में उनकी भूमिका साबित हुई। विशेष ट्राइब्यूनल ने उन्हें नरसंहार, हत्या और यातना जैसे मामलों में दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई। निजामी कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी का शीर्ष नेता था, और उसके खिलाफ फैसला बांग्लादेश के सबसे चर्चित युद्ध-अपराध मामलों में से एक माना जाता है।

शेख हसीना से पहले जिन नेताओं की फांसी ने वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं, उनमें इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन शीर्ष पर हैं। 2006 में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध, राजनीतिक दमन और नरसंहार संबंधी आरोपों में दोषी ठहराया गया था। उनके शासनकाल में शिया और कुर्द समुदायों पर हुए अत्याचारों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एजेंसियों ने गंभीर अपराध माना। अमेरिकी आक्रमण के बाद सद्दाम की गिरफ्तारी और उसके बाद चली लंबी कानूनी प्रक्रिया अंततः उनकी मौत की सजा पर खत्म हुई। आधुनिक इतिहास में इसे सबसे विवादित और चर्चित फांसियों में से एक माना जाता है, जिसने विश्व राजनीति और पश्चिम एशिया की शक्ति-संतुलन को गहराई से प्रभावित किया।

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