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गोपालगंज। जिले में शिक्षा विभाग के एक बड़े फैसले से 33 शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। विभाग के आदेश के बाद शिक्षकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि बिना रिक्ति के जिला अपीलीय प्राधिकार से नियुक्त शिक्षकों को सेवा मुक्त करने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले से प्रभावित शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है।
शिक्षा विभाग का आदेश और कोर्ट का फैसला
जिला शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा द्वारा जारी पत्रांक संख्या 1212 के तहत जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने सभी प्रखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश दिया है कि बिना स्वीकृत पदों के जिला अपीलीय प्राधिकार से नियुक्त शिक्षकों को सेवा मुक्त किया जाए। साथ ही, उन्हें अब तक दिए गए वेतन की वसूली करने का भी आदेश दिया गया है।
यह कार्रवाई सीडब्ल्यूजेसी 16170/2022 (कामिनी कुमारी बनाम बिहार सरकार एवं अन्य) के तहत पटना हाईकोर्ट के 7 मार्च 2025 के आदेश के अनुसार की जा रही है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य अपीलीय प्राधिकार द्वारा इन शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध माना गया था और उनकी अपील को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए इनकी सेवा समाप्त करने और वेतन वसूली का आदेश दिया।
किन शिक्षकों पर पड़ा असर?
इस आदेश के तहत विभिन्न प्रखंडों के 33 शिक्षकों को सेवा मुक्त किया गया है:
- बैकुंठपुर – 14 शिक्षक
- बरौली – 5 शिक्षक
- गोपालगंज – 3 शिक्षक
- फुलवरिया व कुचायकोट – 2-2 शिक्षक
- थावे, विजयीपुर, भोरे, पंचदेवरी, मांझागढ़, सिधवलिया और उचकागांव – 1-1 शिक्षक
शिक्षकों में असमंजस, वेतन वसूली का भी आदेश
शिक्षा विभाग ने न केवल इन शिक्षकों को सेवा मुक्त करने का आदेश दिया है, बल्कि अब तक दिए गए वेतन की भी वसूली की जाएगी। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को इस आदेश को तुरंत प्रभाव से लागू करने का निर्देश मिला है। इस फैसले के बाद प्रभावित शिक्षकों में घबराहट है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह आदेश अन्यायपूर्ण है और इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।
हालांकि, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि वह उच्च न्यायालय के फैसले का पालन कर रहा है और इसमें कोई बदलाव संभव नहीं है। अब देखना होगा कि क्या प्रभावित शिक्षक इस फैसले के खिलाफ कोई कानूनी कदम उठाते हैं या फिर सरकार से राहत की उम्मीद करते हैं।