राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर चुना गया है। 17 अप्रैल 2026 को हुए इस चुनाव में वे निर्विरोध जीते, क्योंकि विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया गया। यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है, जो 9 अप्रैल को पिछले कार्यकाल के समाप्त होने के कुछ ही दिनों बाद शुरू हुआ।

2018 से अब तक उनका बिना किसी व्यवधान के इस पद पर बने रहना यह दिखाता है कि उन्हें विभिन्न दलों के बीच व्यापक समर्थन और संस्थागत भरोसा हासिल है। इसी के साथ वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने उपसभापति के रूप में तीन या उससे अधिक कार्यकाल पूरे किए हैं। अगर रिकॉर्ड की बात करें तो सबसे अधिक बार इस पद पर रहने का रिकॉर्ड अभी भी नजमा हेपतुल्ला के नाम है, जिन्होंने चार अलग-अलग कार्यकाल (1985, 1988, 1992 और 1998) में यह जिम्मेदारी निभाई। इस सूची में अब हरिवंश दूसरे स्थान पर आ गए हैं।

दरअसल, उनके कार्यकाल की एक खास बात यह भी है कि वे राज्यसभा के नामित सदस्य हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें मनोनीत किया था। वे इस पद पर पहुंचने वाले पहले नामित सदस्य हैं, जो इसे और भी विशेष बनाता है। उनका चुनाव काफी सहज और सर्वसम्मति से संपन्न हुआ। सदन के नेता जेपी नड्डा ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसका समर्थन किया। राज्यसभा में कुल 12 नामित सदस्य होते हैं, जिन्हें साहित्य, कला, विज्ञान और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है। हरिवंश ने पहली बार 2018 में यह पद संभाला था और अब तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ उनके 2032 तक सक्रिय भूमिका निभाने की संभावना जताई जा रही है।