क्या चिराग पासवान फिर से 2020 के ‘मोदी जी से बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं’ वाले मोड में आ गए हैं? बिहार की राजनीति में गर्माया माहौल

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की सियासत में एक बार फिर से चिराग पासवान और उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) चर्चा के केंद्र में आ गई है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव का चर्चित नारा ‘मोदी जी से बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं’ लोगों के जेहन में ताजा हो गया है, क्योंकि चिराग पासवान के हालिया बयान और उनकी राजनीतिक गतिविधियां उसी दौर की याद दिला रही हैं। इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या चिराग वाकई अपने पुराने तेवर में लौट रहे हैं, और क्या यह भाजपा की किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

2020 की रणनीति: नीतीश को कमजोर करने का दांव
2020 के विधानसभा चुनाव में, चिराग पासवान ने अपनी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग कर लिया था। उनकी रणनीति स्पष्ट थी: नीतीश कुमार को कमजोर करना। उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के खिलाफ 137 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक भी प्रत्याशी नहीं खड़ा किया। यह रणनीति काम कर गई, और JDU की सीटें 115 से घटकर 43 रह गईं, जिससे वह NDA गठबंधन में ‘छोटा भाई’ बन गई। वहीं, BJP ने 74 सीटें जीतकर गठबंधन में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। हालांकि, इस रणनीति का नुकसान चिराग पासवान की पार्टी को भी हुआ, क्योंकि उन्हें केवल एक सीट मिली। लेकिन बाद में उन्हें केंद्रीय मंत्री के रूप में इसका लाभ मिला।

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चिराग पासवान का खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “हनुमान” बताना और BJP के प्रति अपनी निष्ठा दिखाना इस बात का संकेत देता रहा है कि कहीं न कहीं यह पूरी रणनीति BJP के इशारे पर ही थी।

2025 का परिदृश्य: क्या इतिहास दोहराया जा रहा है?
अब 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच, चिराग पासवान फिर से सुर्खियों में हैं। पहले उन्होंने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कहकर NDA के भीतर और बाहर खलबली मचा दी थी।

फिलहाल, चिराग पासवान NDA का हिस्सा हैं और केंद्र में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री भी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने बिहार में सभी पांच आवंटित सीटें जीतीं, जिससे उनका सियासी कद काफी बढ़ा है। यह प्रदर्शन उन्हें NDA के भीतर एक मजबूत सहयोगी बनाता है। हालांकि, बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA सरकार में उनकी पार्टी शामिल नहीं है, जिसके कारण वे लगातार नीतीश सरकार की नीतियों, खासकर कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं।

हाल ही में, चिराग पासवान ने नालंदा में हुए दोहरे हत्याकांड का जिक्र करते हुए बिहार में अपराध चरम पर होने की बात कही, और मुख्यमंत्री के गृह जिले में ऐसी घटना होना अपराधियों के हौसले को दर्शाता है।

मांझी की ‘अभिमन्यु’ वाली टिप्पणी और उसके मायने
केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता जीतन राम मांझी, जो बिहार की राजनीति में NDA के एक प्रमुख किरदार हैं, ने चिराग पासवान द्वारा बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर नीतीश कुमार पर बार-बार सवाल उठाने पर उनकी तुलना महाभारत के अभिमन्यु से की है। मांझी ने कहा कि युवा नेता कभी-कभी शासन की जटिलताओं को पूरी तरह नहीं समझ पाते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “कभी-कभी भरोसेमंद लोग भी स्थिति को नहीं समझते और बयान दे देते हैं।” मांझी ने कहा कि चिराग पासवान NDA में एक अच्छे नेता हैं, लेकिन वह युवा हैं और युवा लोग कभी-कभी बारीकियों को नहीं समझते। उन्होंने अभिमन्यु का उदाहरण देते हुए कहा कि वह पूरी ताकत से आगे बढ़े, लेकिन कुछ कमी रह गई।

मांझी की यह टिप्पणी इस सवाल को जन्म देती है कि क्या चिराग को इस ‘चक्रव्यूह’ में घुसने के लिए कहीं और से ‘शह’ मिल रही है? क्या BJP, नीतीश कुमार पर दबाव बनाने के लिए चिराग पासवान का इस्तेमाल कर रही है, जैसा कि 2020 में भी आरोप लगे थे? बिहार की राजनीति में आने वाले दिन इस सवाल का जवाब देंगे।

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