- राज्य स्वास्थ्य विभाग की पहल पर केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद देश का पहला राज्य बन गया है, जो अब घर-घर जाकर कुष्ठ मरीजों की खोज कर रहा है।
- राज्य से कुष्ठ के उन्मूलन को लक्ष्य रखते हुए, स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान और कुष्ठ खोज अभियान शुरू किए गए हैं।
- राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) के तहत राज्य में कुष्ठ रोग का बोझ कम करने, विकलांगता को कम करने और जनता को जागरूक करने के लिए काम किया जा रहा है।
- यह अभियान 30 जनवरी को शुरू हुआ और 14 फरवरी तक चलेगा।
- स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि सभी जिलों में जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है और लगभग 13,500 गांवों में कुष्ठ खोज अभियान चलाया जा रहा है।
सिटी पोस्ट लाइव
रांची । झारखंड सरकार ने कुष्ठ रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। इसके तहत उन्हें हर महीने 500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह योजना राज्य के 4000 कुष्ठरोगियों से शुरू हुई है, लेकिन इस वर्ष 8000 लोगों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। अब टीबी मरीजों की तरह कुष्ठ मरीजों को भी हर महीने 500 रुपये दिए जाएंगे, जिससे वे पौष्टिक भोजन कर सकेंगे। पुराने मरीजों को 12 महीने और नए मरीजों को छह महीने की उपचार अवधि तक प्रति माह 500 रुपये देने का प्रावधान किया गया है।
राज्य स्वास्थ्य विभाग की पहल पर केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद देश का पहला राज्य बन गया है, जो अब घर-घर जाकर कुष्ठ मरीजों की खोजकर रहा है। राज्य में कुष्ठ रोग का बोझ कम करने, विकलांगता को कम करने और जनता को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम संचालित है। राज्य से कुष्ठ के उन्मूलन को लक्ष्य रखते हुए, स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान और कुष्ठ खोज अभियान शुरू किए गए हैं, जो 30 जनवरी को शुरू हुए और 14 फरवरी तक चलेंगे।
स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि सभी जिलों में जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है और लगभग 13,500 गांवों में कुष्ठ खोज अभियान चलाया जा रहा है, जहां बीते 5 से 7 वर्षों में कुष्ठ रोगी मिले हैं। जबकि, मुख्य सचिव के निदेर्शानुसार, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग कुष्ठ रोग खोज अभियान में सहिया एवं एक पुरुष स्वैच्छिक कार्यकर्ता का खोजी दल बनाया गया है। हर पांच खोजी दल पर एक पर्यवेक्षक लगाया गया है, जो घर घर जाकर त्वचा की जांच करेंगे और संदेहास्पद रोगी की सूची बनाएंगे।
मुख्य सचिव के अनुसार, खोजी दल द्वारा तैयार किए गए संदेहास्पद मरीजों को पर्यवेक्षक चिकित्सक के पास भेजा जाएगा, जो रोग की संपुष्टि सुनिश्चित करेगा, जो एचएससी, पीएचसी और सीएचसी में व्यवस्था की गई है। रोग की संपुष्टि होने पर मरीज का निबंधन करते हुए उपचार शुरू किया जाएगा। मुख्य बात यह है कि मरीज सरकार में निबंधित होने के बाद पोषण राशि का हकदार होगा। इसके लिए, निबंधन के समय ही एक बैंक खाता बनाया जाता है, जिसमें पोषण राशि का भुगतान किया जाएगा। अगर किसी कारण से भुगतान नहीं हो सका, तो भुगतान अगले दो माह में किया जाएगा।